प्रशांत झा अध्यक्ष, कपिल पैकरा सचिव और वकील भारती वित्त सचिव निर्वाचित
सूरजपुर, 8 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS) का 6वां राज्य सम्मेलन 6 और 7 अक्टूबर को सूरजपुर में आयोजित हुआ। सम्मेलन के दौरान 25 सदस्यीय नई राज्य समिति का गठन किया गया। इसमें प्रशांत झा को अध्यक्ष, कपिल पैकरा को सचिव और वकील भारती को कोषाध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

नई कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष के रूप में संजय पराते और ऋषि गुप्ता तथा संयुक्त सचिव के रूप में रफीक कुरैशी और बलबीर नागेश को जिम्मेदारी दी गई। कार्यकारिणी सदस्यों में कोरबा से राजकुमारी बिंझवार सहित विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। नई समिति में युवाओं के उत्साह और वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का समन्वय देखने को मिला।

किसानों की मांगों को लेकर निकाली विशाल रैली
सम्मेलन की शुरुआत किसानों की विशाल रैली से हुई। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने शहर का भ्रमण करते हुए फसल की सकल लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य, महंगाई पर नियंत्रण और किसान आत्महत्याओं पर रोक लगाने की मांग उठाई।
रैली में मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई, ग्रामीणों एवं किसानों की जमीन के अधिग्रहण और विस्थापन पर रोक तथा केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ भी आवाज बुलंद की गई।
रैली के बाद वरिष्ठ किसान नेता माधो सिंह ने ध्वजारोहण किया। इसके पश्चात शहीद वेदी पर प्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित की और सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई।

कृषि संकट और किसान आंदोलन पर हुई चर्चा
सम्मेलन में राज्य सचिव कपिल पैकरा ने राजनीतिक-सांगठनिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने देश-दुनिया की राजनीतिक परिस्थितियों के साथ छत्तीसगढ़ में गहराते कृषि संकट और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने ग्रामीण मजदूरों, विस्थापन पीड़ितों, वनोपज संग्राहकों, दूध एवं सब्जी उत्पादकों तथा गन्ना किसानों को संगठित करने पर जोर दिया। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कही गई।
सम्मेलन में “हर गांव में किसान सभा और किसान सभा में हर किसान” के लक्ष्य के साथ संगठन को मजबूत करने और आगामी दिनों में किसान आंदोलन का विस्तार करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
राज्यभर से निर्वाचित 184 प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में हिस्सा लिया। सचिव की रिपोर्ट पर 37 प्रतिनिधियों ने चर्चा में भाग लिया, जिसके बाद रिपोर्ट को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

जल-जंगल-जमीन और विस्थापन के मुद्दे पर संघर्ष का संकल्प
किसान सभा ने जल, जंगल, जमीन, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा तथा बड़े पैमाने पर हो रहे विस्थापन के खिलाफ ग्रामीण जनता को लामबंद करने का संकल्प लिया।
अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव अवधेश कुमार और बादल सरोज तथा केंद्रीय किसान कौंसिल के सदस्य पुष्पेंद्र त्यागी ने सांगठनिक सत्र को संबोधित किया। वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ में किसानों, आदिवासियों और दलितों से जुड़े संगठनों को साझा मुद्दों पर एकजुट कर व्यापक किसान आंदोलन खड़ा करने पर जोर दिया।

कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित
सीपी शुक्ला के संयोजकत्व में गठित प्रस्ताव समिति ने हसदेव जंगलों के विनाश के खिलाफ, बस्तर में आदिवासियों के मानवाधिकारों के मुद्दे, मनरेगा को प्रभावी बनाने, पेसा और वनाधिकार कानून लागू करने, भूमि अधिग्रहण प्रभावित परिवारों को रोजगार एवं पुनर्वास तथा मनरेगा में 200 दिन काम और 600 रुपये दैनिक मजदूरी सहित विभिन्न प्रस्ताव सम्मेलन में रखे।
इन सभी प्रस्तावों को प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से पारित किया।

अखिल भारतीय सम्मेलन के लिए 10 प्रतिनिधि चुने गए
तेलंगाना के नालगोंडा में होने वाले 36वें अखिल भारतीय किसान सभा सम्मेलन के लिए भी 10 प्रतिनिधियों का चयन किया गया। इनमें दीपक साहू, प्रशांत झा, कपिल पैकरा, संजय पराते, ऋषि गुप्ता, राजकुमारी बिंझवार, बसंती देवी विश्वकर्मा, वकील भारती, दामोदर श्याम और रफीक कुरैशी शामिल हैं।
सम्मेलन के समापन पर नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रशांत झा और सचिव कपिल पैकरा ने किसान सभा के संगठन को मजबूत करने तथा किसानों और ग्रामीण जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

















