कोरबा। जिले के सीतामढ़ी रेत खदान में प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद अवैध रेत उत्खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, हर दिन सैकड़ों ट्रैक्टर और टीपर बिना किसी रोक-टोक के रेत लादकर निकल रहे हैं। इससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि रेत माफिया खुलेआम अपनी तिजोरी भर रहे हैं। खनिज विभाग ने खदानों के बाहर सूचना पटल लगाए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि अवैध रेत उत्खनन करने वालों को 2 से 5 वर्ष तक की सजा हो सकती है। बावजूद इसके, रेत माफिया बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, जिससे सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हर दिन 500 से अधिक वाहन ले जा रहे अवैध रेत- स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रतिदिन 500 से अधिक ट्रैक्टर और टीपर अवैध रूप से रेत लेकर निकलते हैं। यदि अनुमान लगाया जाए, तो इससे शासन को हर दिन 3 से 4 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है, जो सालाना करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है। यह पैसा सरकार के खजाने में जाने के बजाय रेत माफिया की जेब में जा रहा है। इस अवैध कारोबार से न सिर्फ सरकारी राजस्व की क्षति हो रही है, बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। अंधाधुंध रेत खनन के कारण जल स्रोतों पर संकट गहराता जा रहा है, जिससे नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
तेज रफ्तार रेत परिवहन से बढ़ रहीं दुर्घटनाएं– अवैध रेत परिवहन में लगे वाहन चालक तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। बीते कुछ महीनों में कई लोग इन दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। तेज गति से चलते भारी वाहनों के कारण सड़कों पर हादसे आम हो गए हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल- अवैध रेत उत्खनन को लेकर क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन की चुप्पी किसी दबाव का परिणाम है? क्या रेत माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
सख्त कार्रवाई की मांग- क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द अवैध रेत खनन और तेज रफ्तार से हो रहे परिवहन पर रोक लगाए। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो इससे न केवल सरकार को आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि सड़क हादसों में और अधिक निर्दोष लोगों की जान जा सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और इस अवैध कारोबार को तुरंत रोके।















