बाइक रैली में 5 लीटर पेट्रोल के इंतजाम को लेकर सियासी चर्चा तेज। ‘सेवा यात्रा’ के ईंधन खर्च का इंतजाम किसने किया और फाइनेंसर कौन है, जानिए पूरा मामला।
कोरबा। सेवा संकल्प अभियान के तहत 1 अक्टूबर को भैसमा से पसान तक बाइक रैली प्रस्तावित है। अखबार में प्रकाशित कार्यक्रम के मुताबिक रैली दोपहर 2:30 बजे भैसमा पहुंचेगी, इसके बाद शाम 4:30 बजे पसान और रात करीब 8:30 बजे कटघोरा पहुंचेगी। मजे वाली बात यह है कि रैली के लिए कुछ बाइक सिर्फ कोरबा से उरगा तक जाने की चर्चा है। इस सियासी बाइक रैली ने एक अलग ही सवाल खड़ा कर दिया है।
10 KM की रैली और 5 लीटर पेट्रोल का हिसाब!
रैली को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा है कि बाइक सवारों के लिए पेट्रोल का इंतजाम आखिर किसके जिम्मे है? अगर एक बाइक के लिए 5 लीटर पेट्रोल की व्यवस्था की जा रही है, तो इसका खर्च कौन उठा रहा है? संगठन, समर्थक, कार्यकर्ता या कोई स्थानीय फाइनेंसर?
सवाल इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि कार्यक्रम को ‘सेवा यात्रा’ बताया गया है, जबकि यात्रा के साथ जुड़े खर्च और उसके स्रोत को लेकर तस्वीर सार्वजनिक नहीं है।
फाइनेंसर कौन? या फिर कार्यकर्ताओं की अपनी जेब?
बड़ा सवाल यह नहीं कि बाइक रैली कितनी लंबी है। सवाल यह है कि रैली के ईंधन और दूसरे खर्चों का भुगतान किस मद से हो रहा है?
अगर खर्च किसी संगठन या राजनीतिक दल के खाते से हो रहा है तो उसका हिसाब क्या है? और यदि किसी समर्थक या कारोबारी ने खर्च उठाया है, तो क्या उसका नाम और योगदान सार्वजनिक किया जाएगा?
फिलहाल किसी व्यक्ति या संस्था को फाइनेंसर बताने की पुष्टि नहीं है। लिहाजा असली सवाल यही है कि 5 लीटर पेट्रोल की पर्ची किसके नाम कट रही है?
‘सेवा यात्रा’ में सेवा किसकी और खर्च किसका?
राजनीतिक कार्यक्रमों में खर्च और उसके स्रोत को लेकर पारदर्शिता हमेशा चर्चा का विषय रहती है। ऐसे में भैसमा से पसान तक प्रस्तावित बाइक रैली को लेकर भी आयोजकों से खर्च का विवरण सामने आने का इंतजार रहेगा।बाइक आपकी, रैली आपकी, पेट्रोल किसका?।और अगर पेट्रोल भी किसी ‘सेवाभावी’ ने भराया है, तो उस सेवाभावी का नाम सामने आएगा क्या?

















