कोरबा एनटीपीसी की धनरास राख डेम से उड़ती राख ने आसपास के ग्रामीणों की जिंदगी दूभर कर दी है। दर्जनों गांवों के लोग इस जहरीली राख की चपेट में आकर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद एनटीपीसी प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि राख डेम की निगरानी और सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही है। उड़ती राख खेतों, घरों और जलस्रोतों को प्रदूषित कर रही है, जिससे जीवन यापन मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार शिकायत और धरना प्रदर्शन के बावजूद एनटीपीसी प्रबंधन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
गांववालों ने यह भी कहा कि एनटीपीसी से उन्हें न तो रोज़गार मिला और न ही उड़ती राख से निजात। “हम राख खा रहे हैं, सांस ले रहे हैं राख में। खेत बर्बाद हो गए, पानी पीने लायक नहीं रहा,” एक स्थानीय किसान ने रोष जताते हुए कहा। ग्रामीणों की मांग है कि राख डेम को ढंकने की व्यवस्था की जाए, नियमित छिड़काव हो और राख के निस्तारण में सतर्कता बरती जाए। इसके साथ ही प्रभावित गांवों को मुआवजा और स्वास्थ्य सुविधा भी दी जाए। सरकारी विभागों की चुप्पी और एनटीपीसी की उदासीनता ने लोगों को खुद के हक की लड़ाई लड़ने पर मजबूर कर दिया है।















