रायपुर। मध्य प्रदेश के भाजपा विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों से जुड़ी करीब 1,000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में कोलकाता पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। कारोबारी महेंद्र गोयनका की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम शनिवार को रायपुर पहुंची, लेकिन पुलिस के पहुंचने की भनक लगने के बाद कारोबारी के फरार होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब उसके संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही है।
गिरफ्तारी वारंट लेकर रायपुर पहुंची पुलिस
मामले में कोलकाता हाई कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद कोलकाता पुलिस की टीम रायपुर पहुंची थी। पुलिस खम्हारडीह थाने में स्थानीय स्तर पर जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही थी। इसी दौरान कारोबारी महेंद्र गोयनका को पुलिस की कार्रवाई की जानकारी मिलने और उसके फरार होने की बात सामने आई। फिलहाल पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
महेंद्र गोयनका मूल रूप से मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के निवासी बताए जाते हैं। वह रायपुर के खम्हारडीह थाना क्षेत्र के कचना स्थित आनंदम वर्ल्ड सिटी में रह रहे थे। उनका कारोबार माइनिंग, मिनरल्स, इस्पात, जेम्स और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है। वह कई कंपनियों में निदेशक और कारोबारी साझेदार भी हैं।
जाली दस्तावेज और फर्जी हस्ताक्षर से शेयर हस्तांतरण का आरोप
यह मामला यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के शेयरों के कथित अवैध हस्तांतरण से संबंधित है। कोलकाता के बोबाजार थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, महेंद्र गोयनका और उनके सहयोगियों पर कथित तौर पर जाली दस्तावेज, फर्जी हस्ताक्षर और कंपनियों की नकली मुहरों का इस्तेमाल कर शेयरों का मालिकाना हक बदलने का आरोप है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस कथित साजिश के जरिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करने का प्रयास किया गया। पुलिस मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।
5,000 शेयरों के मालिकाना हक को लेकर विवाद
शिकायतकर्ता एडमिट विनट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक गोपाल कुमार यादव के अनुसार, उनकी कंपनी के पास व्यू टेक मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के 5,000 शेयर थे। शिकायत के मुताबिक, ये शेयर 4 फरवरी 2018 को विधिवत उनकी कंपनी के नाम दर्ज किए गए थे।
आरोप है कि बाद में संशोधित वार्षिक रिटर्न में इन शेयरों को महेंद्र गोयनका एंड संस के नाम पर दर्शा दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि शेयरों के हस्तांतरण के लिए उनकी कंपनी ने सहमति नहीं दी थी। इसी कथित अनियमितता को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।
हालांकि, शेयरों के स्वामित्व और दस्तावेजों में कथित हेरफेर से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होनी बाकी है।
आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
इस मामले में 30 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के बोबाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें कारोबारी महेंद्र गोयनका समेत आठ लोगों को नामजद किया गया है। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत जांच की जा रही है।
पुलिस की तलाश जारी
करीब 1,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों और कंपनियों के शेयरों से जुड़े इस मामले में कोलकाता पुलिस रायपुर में कारोबारी की तलाश कर रही है। अब जांच के दौरान कथित दस्तावेजी गड़बड़ियों, शेयरों के हस्तांतरण और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।















