रायपुर/कोरबा।
समग्र शिक्षा राज्य कार्यालय रायपुर एक बार फिर विवादों में घिर गया है। आरोप है कि FLN डीपीएमयू प्रोजेक्ट (फाउंडेशन लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी) के तहत 41 पीएमयू भर्ती और ट्रांसफर में बड़े पैमाने पर पैसों का खेल खेला गया।
बताया जा रहा है कि अपात्र उम्मीदवारों से 3 से 5 लाख रुपए तक लेकर नियुक्तियां की गईं, जबकि योग्य आवेदकों को दरकिनार कर दिया गया। इस पूरे मामले में सहायक संचालक एम. सुधीश कुमार और सहायक परियोजना अधिकारी रायपुर ऋषि पांडे के नाम सामने आ रहे हैं।
इस घोटाले को लेकर बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में प्रश्न भी उठाया था, जिसकी जांच अभी तक जारी है।

चैटिंग और ऑडियो से खुली पोल
सूत्रों के अनुसार, ABM कंपनी की HR मानसी शुक्ला और अन्य पदाधिकारियों के बीच हुई वॉट्सएप चैटिंग सामने आई है, जिसमें दबाव बनाकर ज्वाइनिंग कराने की बात कही गई है। वहीं, कोरबा पदस्थ सरोज कुमार साहू का मामला और भी चौंकाने वाला है।
- फरवरी 2022 से नियुक्त सरोज साहू का ट्रांसफर शक्ति जिला कर दिया गया, जबकि कोरबा में सूची के अनुसार अभी भी वही पदस्थ हैं।
- आरोप है कि सहायक संचालक सुधीश कुमार ने फोन पर उन्हें गाली-गलौज की और धमकाया — “मैं जिसको जो बोलता हूं वही आदेश है, तुम्हारी टेबल-कुर्सी फेंकवा दूंगा।”
- इस पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
सरोज साहू ने लगातार राज्य कार्यालय रायपुर, जिला मिशन समन्वयक कार्यालय कोरबा, कलेक्टर कोरबा और ABM कंपनी तक शिकायतें दर्ज कराई हैं। कंपनी ने 1 सितंबर से शक्ति में ज्वाइनिंग का मेल किया, लेकिन डीईओ शक्ति ने राज्य कार्यालय का आदेश मांगा, जो अब तक जारी नहीं हुआ।
इससे साफ संकेत मिलता है कि राज्य कार्यालय स्तर पर ही ट्रांसफर-पोस्टिंग का खेल चल रहा है।
मंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग
मामले के गंभीर होने और वीडियो-रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद अब मांग उठ रही है कि नवपदस्थ शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव तुरंत हस्तक्षेप करें और दोषी अधिकारियों पर निलंबन एवं विभागीय जांच की कार्यवाही करें।















