भिलाई निगम ने भिलाई स्टील प्लांट को दिया 228 करोड़ का टैक्स अल्टीमेटम…IIT‑Bhilai से ड्रोन सर्वे की तैयारी

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भिलाई, 03 अगस्त। Action on BSP : नगर निगम भिलाई ने BSP को ₹228 करोड़ का वार्षिक प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने का नोटिस जारी किया है। संयंत्र को यह राशि जमा करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि अभी तक BSP की ओर से यह राशि जमा नहीं की गई है।

नया नहीं है यह विवाद

नगर निगम ने 27 अप्रैल 2019 को BSP को एक पुराने कर बकाया मामले के लिए पहले ही कुर्की नोटिस थमाया था। आरोप था कि संयंत्र ने संपत्ति विवरण कम‑ज्यादा दर्ज किया है और शिक्षा उपकर में गड़बड़ी की गई है। यह मामला अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। याचिका और RTI में प्राप्त 6000+ पन्नों ने पुष्टि की है कि BSP ने हॉस्पिटल, पार्क, स्कूल, CISF/BSF/SSB आवास आदि को ‘सार्वजनिक सम्पत्तियाँ’ मानकर स्व-विवरणी में नहीं शामिल किया था। निगम का दावा है कि ये सभी प्रॉपर्टी टैक्स योग्य हैं, जिसका भुगतान तक अब तक नहीं हुआ है।

हाई‑टेक सर्वे की तैयारी

निगम प्रशासन BSP टाउनशिप और इस्पात संयंत्र परिसर में स्थित सभी संपत्तियों का जीआईएस-आधारित सर्वे कराने की योजना बना रहा है। इस सर्वे के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग प्रस्तावित है।निगम ने IIT भिलाई से संपर्क किया है, स्थानीय तकनीकी विश्वविद्यालय का ड्रोन सर्वेक्षण समाधान निगम अधिकारियों द्वारा सबसे विश्वसनीय पाया गया है। यदि IIT से डील हो जाती है, तो किसी अन्य एजेंसी को यह कार्य नहीं दिया जाएगा।

निगम व संयंत्र प्रबंधन की रणनीति

निगम आयुक्त राजीव कुमार पांडे की ओर से कहा गया है कि ₹228 करोड़ का नोटिस एक वर्ष (2024–25) का है, और सर्वे के बाद उसका आवेदन अगले चरण में निर्णय करेगा। वैकल्पिक एजेंसियों पर चर्चा हुई, लेकिन तकनीकी विश्वसनीयता और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए IIT भिलाई फिलहाल सबसे प्राथमिक विकल्प बना हुआ है।

संभावित असर

यदि IIT का ड्रोन GIS सर्वे सफलतापूर्वक संपन्न हो जाता है, तो निगम (Action on BSP) बिना किसी भौगोलिक विवाद के प्रत्येक निर्माण, जमीन, पार्क व सामाजिक-धार्मिक संरचना का कर योग्य मूल्यांकन कर पाएगा। इसके माध्यम से निगम की पारदर्शिता, स्व-विवरणी की सच्चाई और रियल एम्प्लॉयर मार्केट वैल्यू जैसे आय वसूली क्षेत्रों में स्पष्टता आएगी। BSP ने अभी तक जवाबी कार्रवाई नहीं की है, लेकिन निगम द्वारा भेजे गए 30‑दिन के डेडलाइन नोटिस के बाद किराया-पैनल्टी वसूलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

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