जिले के वनांचल क्षेत्र से प्रशासनिक लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय से महज़ 20 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत माखुरपानी के आश्रित ग्राम विश्रामपुर में पिछले कई महीनों से आंगनबाड़ी कचरा शेड में संचालित की जा रही है। ग्रामीण अंचल में छोटे बच्चों के पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी जिस आंगनबाड़ी केंद्र पर है, उसकी यह स्थिति विकास के दावों की पोल खोलती है। गौरतलब है कि हाल ही में आसपास की पंचायतों में नए आंगनबाड़ी स्वीकृत होने के बाद विकास की तस्वीर बदलने के दावे किए गए थे, लेकिन विश्रामपुर का यह हाल इन दावों पर बड़े सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी जैसे केंद्रों को साफ-सुथरे और सुरक्षित स्थान पर होना चाहिए, क्योंकि यहां बच्चों को पोषण आहार, टीकाकरण और प्रारंभिक शिक्षा जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। लेकिन कचरा शेड में आंगनबाड़ी का संचालन बच्चों की सेहत से सीधा खिलवाड़ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नाराज़गी जताते हुए कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग और पंचायत अधिकारी आखिर अब तक इस स्थिति से अनजान क्यों बने रहे। करोड़ों रुपये हर साल आंगनबाड़ी भवनों और पोषण सुधार योजनाओं पर खर्च होने के बावजूद बच्चों को ऐसा अस्वच्छ माहौल मिलना गंभीर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द आंगनबाड़ी को इस कचरा शेड से हटाकर बच्चों के लिए उपयुक्त भवन उपलब्ध कराया जाए और इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। विश्रामपुर का यह मामला न केवल आंगनबाड़ी व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जमीनी स्तर तक योजनाओं के क्रियान्वयन में कितनी लापरवाही बरती जा रही है। सवाल यह है कि जब मुख्यालय के पास ही यह स्थिति है, तो दूरस्थ इलाकों में हालात कैसे होंगे?
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