Korba Breaking- डीके हॉस्पिटल में नाबालिग की डिलीवरी का मामला- रिश्तेदार निकला आरोपी, शासकीय अस्पताल की भूमिका पर भी उठे सवाल…

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कोरबा T.P. नगर स्थित डीके हॉस्पिटल में नाबालिग लड़की की डिलीवरी का मामला तूल पकड़ चुका है। तीन दिनों से चर्चा में चल रहे इस प्रकरण में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पीड़िता का शिकार कोई और नहीं बल्कि उसका ही रिश्तेदार निकला है। आरोपी अशोक के विरुद्ध कोतवाली पुलिस ने पोक्सो एक्ट और बलात्कार की धाराओं में अपराध दर्ज किया है। वहीं, अब जांच में नया एंगल भी सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान पीड़िता का चेकअप रानीधनराज कुंवर शासकीय अस्पताल में कराया गया था, लेकिन वहां से मामला दबा रह गया। इससे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। 10 सितंबर की रात 11 से 12 बजे के बीच कुछ महिलाएं गंभीर हालत में युवती को लेकर डीके हॉस्पिटल पहुंचीं। इमरजेंसी देखते हुए महिला चिकित्सक ने तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन किया और युवती ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। इसी दौरान चिकित्सक को संदेह हुआ कि लड़की नाबालिग है। परिजन आधार कार्ड नहीं दिखा सके, जिसके बाद चिकित्सक ने पुलिस को सूचना दी।सीएसईबी से कोतवाली तक मामला- सीएसईबी पुलिस सहायता केंद्र ने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हुए शून्य पर अपराध दर्ज किया और केस नंबरी के लिए कोतवाली थाने भेजा। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने आरोपी अशोक के विरुद्ध पोक्सो एक्ट और बलात्कार की धाराओं में अपराध दर्ज कर दिया।

रिश्तेदार ही बना दरिंदा– जांच में सामने आया कि पीड़िता के पिता का निधन हो चुका है और मां बिहार में रहती है। करीब 7-8 साल की उम्र से ही आरोपी अशोक ने पीड़िता को अपने पास रखकर परवरिश शुरू की थी। दूसरी पत्नी से संतान न होने के चलते उसने रिश्ते की मर्यादा तोड़ी और पीड़िता को बहलाकर संबंध बनाए। इसी से वह गर्भवती हो गई।

उम्र और डीएनए टेस्ट होंगे निर्णायक– पुलिस को पीड़िता की उम्र संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिला है। अब बोन मैरो टेस्ट से उसकी वास्तविक उम्र की पुष्टि कराई जाएगी। वहीं, नवजात बच्ची के पिता की पुष्टि के लिए डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा।

शासकीय अस्पताल पर भी उठे सवाल– सूत्रों का दावा है कि गर्भावस्था के दौरान पीड़िता का चेकअप रानीधनराज कुंवर शासकीय अस्पताल में कराया गया था। सवाल उठ रहे हैं कि वहां जांच के दौरान नाबालिग होने की पुष्टि क्यों नहीं की गई और कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ। यदि समय रहते मामला सामने आता तो आरोपी पर कार्रवाई पहले ही हो सकती थी। अब पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है।

पुलिस की सख्ती और आगे की जांच– प्रारंभिक दौर में परिजन पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते रहे, लेकिन गहन जांच ने सच उजागर कर दिया। कोतवाली थाना प्रभारी का कहना है कि आरोपी अशोक पर अपराध दर्ज कर लिया गया है और मामले की तह तक जाने के लिए जांच जारी है। साथ ही शासकीय अस्पताल में हुए चेकअप की भी छानबीन की जा रही है।

यह मामला न सिर्फ कानून और व्यवस्था का सवाल है बल्कि समाज के रिश्तों की पवित्रता और स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

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