केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले 4 नए श्रम कानूनों (Labour Codes) की नीतियों के विरोध में आज पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के ऊर्जाधानी कोरबा में भी भारी विरोध प्रदर्शन देखा गया। भारतीय मजदूर संघ (BMS) के बैनर तले सैकड़ों श्रमिकों और कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
प्रमुख मांगें और विरोध का कारण
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित श्रम संहिताओं (Labour Codes) में कुछ ऐसी नीतियां हैं जो श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं। विशेष रूप से ‘औद्योगिक संबंध संहिता’ (Industrial Relations Code) और ‘व्यावसायिक सुरक्षा व स्वास्थ्य संहिता’ (OSH Code) के कुछ प्रावधानों पर संगठन ने कड़ी आपत्ति जताई है।

बीएमएस के पदाधिकारियों ने बताया कि इन कानूनों से मजदूरों के काम के घंटे, सुरक्षा और यूनियन बनाने के अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
• श्रम संहिताओं में मजदूर विरोधी प्रावधानों में तत्काल संशोधन।
• न्यूनतम पेंशन योजना (EPS-95) में वृद्धि कर इसे ₹7,500 प्रति माह किया जाए।
• ठेका प्रथा को बंद कर श्रमिकों को नियमित रोजगार की सुरक्षा दी जाए।
• ईएसआई (ESI) और पीएफ (PF) की सीमाओं में विस्तार ताकि अधिक श्रमिक लाभान्वित हों।

कोरबा में कलेक्ट्रेट तक रैली और ज्ञापन
कोरबा जिला मुख्यालय पर आयोजित इस ‘धरना, प्रदर्शन व ज्ञापन’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। हाथों में केसरिया झंडे और “भारतीय मजदूर संघ – जिला कोरबा” का बैनर लिए कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय श्रम मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
पोस्टर पर लिखे नारों “राष्ट्र हित – उद्योग हित – मजदूर हित” के साथ प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन मजदूरों के हक से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

संगठन का बयान: “आज पूरे भारत के हर जिले में ज्ञापन दिया जा रहा है। यदि सरकार हमारी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं करती है, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।”















