रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने हिमाचल प्रदेश की मौजूदा स्थिति को लेकर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाला “नाकामी मॉडल” राज्य को गंभीर आर्थिक संकट में धकेल चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े वादों के सहारे सत्ता हासिल करने वाली कांग्रेस सरकार अब अपने ही वादों पर खरा उतरने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
चिमनानी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने जनता से कई आकर्षक घोषणाएं कीं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों को पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। परिणामस्वरूप आज राज्य वित्तीय संकट का सामना कर रहा है और आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
⚠️ “झूठे वादों से सत्ता, फिर संकट”
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी की कार्यशैली ही झूठे वादों पर आधारित है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस द्वारा ऐसी घोषणाएं की गईं, जिनका बजट देश के वार्षिक बजट से भी अधिक बताया गया। चिमनानी के अनुसार, “झूठ बोलकर सत्ता पाना ही कांग्रेस का चरित्र बन गया है।”
🔍 भूपेश बघेल पर भी साधा निशाना
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हिमाचल चुनाव में भूपेश बघेल को ऑब्जर्वर बनाया गया था, लेकिन जिन राज्यों में उन्हें जिम्मेदारी दी जाती है, वहां कांग्रेस को हार या फिर सरकार बनने के बाद आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि 2018 में किए गए वादों को भी कांग्रेस सरकार पूरा नहीं कर पाई थी।
⛽ “जनता पर बढ़ता आर्थिक बोझ”
चिमनानी ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जनता पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। पेट्रोल और डीजल के दामों में एक साथ ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी को उन्होंने “जनता से खुली लूट” करार दिया। उनके अनुसार, राज्य में विकास कार्यों की कमी है और हर तरफ अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है।
🗳️ छत्तीसगढ़ का दिया उदाहरण
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के कामकाज को समझ चुकी थी, इसलिए 2023 के विधानसभा चुनाव में उसे सत्ता से बाहर कर विकास की राह पर चलने वाली भाजपा सरकार को चुना। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकारें अब जनता के लिए “पनौती” साबित हो रही हैं।
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भाजपा द्वारा हिमाचल प्रदेश के आर्थिक हालात को लेकर किया गया यह हमला राजनीतिक तापमान को और बढ़ाने वाला है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने की संभावना है, जहां विकास बनाम वादों की राजनीति प्रमुख मुद्दा बन सकती है।
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