रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 अब कानून बन गया है। राज्यपाल द्वारा विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद इसे राजपत्र (गजट) में प्रकाशित कर दिया गया है, जिसके साथ ही यह विधेयक प्रभावी हो गया है। यह विधेयक राज्य विधानसभा के पिछले सत्र में पारित किया गया था, जिसका उद्देश्य अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाना और इस प्रक्रिया को नियंत्रित करना है। नए कानून में जबरन, प्रलोभन, धोखाधड़ी या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन को दंडनीय अपराध बनाया गया है। कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, यदि पीड़ित महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति/जनजाति जैसे कमजोर वर्ग से संबंधित हो, तो सजा 10 से 20 साल तक बढ़ सकती है। सामूहिक धर्मांतरण (मास कन्वर्जन) के मामलों में और भी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और भारी जुर्माना शामिल है। इसके अलावा, धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को पहले सक्षम अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा, जिसके बाद प्रशासन द्वारा जांच और प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस तरह, छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण से जुड़े मामलों को लेकर अब सख्त कानूनी प्रावधान लागू हो गए हैं।
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