रायपुर/बारनवापारा, 27 मई 2026:
छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभयारण्य के देवपुर वन क्षेत्र से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। यहां दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (इंडियन जायंट स्क्विरल) की मौजूदगी दर्ज की गई है, जिसे जैव विविधता संरक्षण और वन पारिस्थितिकी संतुलन के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वन विभाग और विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रजाति का दिखाई देना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र के जंगलों का प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीव आवास बेहतर स्थिति में पहुंच रहे हैं।
घने और स्वस्थ जंगलों की पहचान मानी जाती है यह प्रजाति
विशेषज्ञ बताते हैं कि भारतीय विशाल गिलहरी सामान्य गिलहरी से काफी बड़ी होती है और यह अधिकतर समय पेड़ों की ऊंची शाखाओं पर ही बिताती है। यह प्रजाति घने, जुड़े हुए और सुरक्षित वन क्षेत्र में ही जीवित रह पाती है। ऐसे में इसका बारनवापारा क्षेत्र में दिखाई देना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि जंगलों की हरियाली, पेड़ों की निरंतरता और प्राकृतिक आवास में सुधार हुआ है।
जैव विविधता संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता
वन विभाग द्वारा लगातार किए जा रहे संरक्षण कार्य, अवैध शिकार पर नियंत्रण, वन क्षेत्रों की निगरानी और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण का सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दुर्लभ प्रजाति की उपस्थिति केवल वन्यजीवों की संख्या बढ़ने का संकेत नहीं है, बल्कि यह पूरे जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण भी है।
पेड़ों की ऊंची शाखाओं पर ही बनाती है अपना संसार
भारतीय विशाल गिलहरी जमीन पर बहुत कम उतरती है और पेड़ों की शाखाओं के बीच लंबी छलांग लगाकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचती है। यह फल, बीज और पेड़ों की छाल पर निर्भर रहती है। वैज्ञानिक इसे जंगलों का “प्राकृतिक संकेतक” मानते हैं, क्योंकि जहां यह प्रजाति मौजूद होती है, वहां का जंगल अपेक्षाकृत सुरक्षित और जैविक रूप से समृद्ध माना जाता है।
वन्यजीव प्रेमियों में बढ़ा उत्साह
दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी की मौजूदगी की खबर सामने आने के बाद वन्यजीव फोटोग्राफरों, प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों में उत्साह बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संरक्षण कार्य इसी तरह जारी रहे तो भविष्य में बारनवापारा क्षेत्र दुर्लभ वन्यजीवों का महत्वपूर्ण आवास बन सकता है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों ने इस खोज को छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा है कि यह आने वाले समय में जैव विविधता संरक्षण अभियानों को और मजबूती देगा। साथ ही लोगों में वन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।















