कोरबा 08 जून 2026। कोरबा नगर निगम में जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने नगर निगम प्रशासन पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए विरोध का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सभापति ने अपनी कुर्सी छोड़ दी और निगम कार्यालय में जमीन पर बैठकर कामकाज शुरू कर दिया।
जानकारी के मुताबिक इस पूरे विवाद की जड़ शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर हुए प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम को माना जा रहा है। आरोप है कि इन आयोजनों की जानकारी न तो महापौर को दी गई और न ही निगम सभापति और संबंधित वार्ड पार्षदों को, जबकि इन सभी कार्यक्रमों में निगम प्रशासन और प्रदेश के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की मौजूदगी रही। सभापति नूतन सिंह ठाकुर का कहना है कि यह केवल प्रोटोकॉल का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुने हुए जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा विषय है।
उनका आरोप है कि नगर निगम प्रशासन लगातार निर्वाचित प्रतिनिधियों को नजर अंदाज कर रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है। दो दिन पहले ही सभापति ने चेतावनी दी थी कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे विरोध स्वरूप जमीन पर बैठकर काम करेंगे। सोमवार को उन्होंने अपनी घोषणा को अमल में लाते हुए निगम कार्यालय में कुर्सी का त्याग कर दिया और जमीन पर बैठकर अपना कामकाज किया।
उधर पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद नगर निगम आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगम सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू होने के बावजूद यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद केवल सूचना नहीं दिए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती खींचतान को भी उजागर करता है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब शहर के विकास और सार्वजनिक कार्यक्रमों की बात हो, तब क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दरकिनार किया जा सकता है ? फिलहाल सभापति के ‘जमीन सत्याग्रह‘ ने निगम की राजनीति को गरमा दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी किस दिशा में जाती है।















