कोरबा। तेज बारिश, कीचड़ से भरे रास्ते और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र भी कलेक्टर कुणाल दुदावत के कदम नहीं रोक सके। बुधवार को वे पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम समेलीभांठा स्थित विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर बस्ती पहुँचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का भरोसा दिलाया।
कलेक्टर ने सबसे पहले गांव के स्कूल और आंगनबाड़ी भवन का निरीक्षण किया। इसके बाद बिरहोर परिवारों के साथ एक कमरे में बैठकर आत्मीय संवाद किया। शुरुआत में ग्रामीण संकोच में रहे, लेकिन कलेक्टर के सहज व्यवहार से उन्होंने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं।
ग्रामीणों ने बिजली, पेयजल, जर्जर स्कूल भवन की मरम्मत, स्कूल की बाउंड्रीवाल, मिडिल स्कूल की स्थापना, पुल निर्माण और भुडूपानी मोहल्ले में मूलभूत सुविधाओं की मांग की। महिलाओं ने भी अपनी दैनिक परेशानियों से प्रशासन को अवगत कराया।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूल व आंगनबाड़ी भवन की मरम्मत, पेयजल के लिए बोर और सोलर ड्यूल पंप, विद्युत लाइन विस्तार, बाउंड्रीवाल निर्माण, तालाब और पुल निर्माण, स्कूल के पास लगे बिजली के खंभे को हटाने, आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराने तथा भुडूपानी के बच्चों के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
चौपाल के दौरान यह भी सामने आया कि बिरहोर परिवार बांस शिल्प में रुचि रखते हैं। इस पर कलेक्टर ने बांस उपलब्ध कराने, हस्तशिल्प निर्माण का प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और तैयार उत्पादों के विपणन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए, ताकि बिरहोर परिवारों को स्थायी आजीविका मिल सके।
ग्राम पंचायत की सरपंच अमिता राज ने भी गांव की विभिन्न समस्याओं से कलेक्टर को अवगत कराया। कलेक्टर ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर परिवारों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है और सभी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाएगी।
बारिश से भीगे उस छोटे से कमरे में लगी चौपाल केवल शिकायतों का मंच नहीं रही, बल्कि प्रशासन और बिरहोर परिवारों के बीच विश्वास, संवेदनशीलता और विकास के नए संवाद की मिसाल बन गई।
इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन, एसडीएम मनोज बंजारे सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।















