इलाहाबाद बैंक चेक बाउंस मामले में आरोपी दोषी, 6 माह की जेल और ₹1.23 लाख प्रतिकर का आदेश

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कोरबा, 19 जुलाई। चेक बाउंस के एक महत्वपूर्ण मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोरबा की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 6 माह के साधारण कारावास और बैंक को ₹1.23 लाख प्रतिकर राशि देने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती सोनी तिवारी की अदालत में हुई। न्यायालय ने परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत लंबित आपराधिक प्रकरण क्रमांक 204/2020 में आरोपी अजय कुमार साहू को दोषसिद्ध पाया।
प्रकरण के अनुसार, इलाहाबाद बैंक, शाखा तिलकेजा (जिला कोरबा) ने आरोपी को व्यवसाय के लिए ₹90,000 का ऋण दिया था। ऋण की नियमित अदायगी नहीं होने के कारण उसका खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके बाद आरोपी ने बैंक के पक्ष में ₹76,000 का चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर वह “Funds Insufficient” (अपर्याप्त निधि) के कारण अनादरित हो गया।
बैंक ने नियमानुसार आरोपी को विधिक नोटिस भेजा, लेकिन निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं होने पर न्यायालय में परिवाद दायर किया गया।
सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से दस्तावेजी साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए गए, जबकि आरोपी अपने बचाव में कोई प्रभावी साक्ष्य पेश नहीं कर सका। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 357(3) के तहत आरोपी को एक माह के भीतर परिवादी बैंक को ₹1,23,000 प्रतिकर राशि अदा करने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन नहीं करने पर आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इस प्रकरण में परिवादी बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने पैरवी की, जबकि आरोपी की ओर से अधिवक्ता सत्यम चौहान उपस्थित हुए।
यह फैसला चेक बाउंस मामलों में न्यायालय के सख्त रुख को दर्शाता है और स्पष्ट संदेश देता है कि चेक जारी कर भुगतान से बचने वालों के विरुद्ध कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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