कोरबा। छत्तीसगढ़ सहित देशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं में केंद्र और राज्य सरकार के बजट को लेकर गहरा असंतोष सामने आया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत 2026–27 के बजट में आंगनबाड़ी कर्मियों के शासकीयकरण, न्यूनतम वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी अहम मांगों पर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। इसी तरह छत्तीसगढ़ सरकार के बजट में भी इन मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है।
संयुक्त मंच द्वारा जारी ज्ञापन में बताया गया कि देश में लगभग 28 लाख और छत्तीसगढ़ में करीब 1 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं कार्यरत हैं, जिनमें बजट से निराशा और आक्रोश व्याप्त है। मंच ने केंद्र व राज्य सरकार से मांग की है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए, ताकि उन्हें नियमित कर्मचारी जैसा दर्जा मिल सके।
मुख्य मांगें इस प्रकार हैं—
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं का शासकीयकरण।
शासकीय कर्मचारी घोषित होने तक न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाए—कार्यकर्ताओं को ₹26,000 और सहायिकाओं को ₹22,100 प्रतिमाह, साथ ही मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष ₹1,000 की वेतनवृद्धि।
सामाजिक सुरक्षा के तहत सेवानिवृत्ति पर पेंशन, ग्रेच्युटी, आकस्मिक मृत्यु पर सहायता और समूह बीमा जैसी सुविधाओं के लिए नीति बनाई जाए।
संयुक्त मंच ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो 26 और 27 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में दो दिवसीय काम बंद कर जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर 9 मार्च 2026 को एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं रायपुर पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगी।
मंच ने सरकार से अपील की है कि आंगनबाड़ी कर्मियों की वर्षों पुरानी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सके।















