कोरबा। पाली थाना क्षेत्र के ग्राम नोनबिर्रा (खलारीपारा) में उस वक्त तनाव और आक्रोश की स्थिति निर्मित हो गई, जब वन विभाग और स्थानीय पुलिस बल पर बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के गरीब आदिवासियों के आशियानों को जबरन जमींदोज करने का गंभीर आरोप लगा। ग्रामीणों का कहना है कि मानसून की दस्तक से ठीक पहले की गई इस अमानवीय कार्रवाई ने कई परिवारों को खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर कर दिया है। घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
महिलाओं के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप
पीड़ित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस अचानक की जा रही तोड़फोड़ का विरोध किया, तो वहां मौजूद पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। घर में अकेली मौजूद महिलाओं के साथ बर्बरतापूर्वक हाथापाई की गई और उन्हें घसीटकर बाहर निकाला गया, जिससे कई महिलाओं के हाथ और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं।
रोती-बिलखती महिलाओं ने जब अधिकारियों से पूछा कि इस बारिश के मौसम में वे अपने बच्चों को लेकर कहां जाएंगी, तो वन कर्मियों ने कथित तौर पर बेहद संवेदनहीन रवैया अपनाते हुए कहा, “तुम लोग कहीं भी जाओ, हमें मालूम नहीं, हमें तो मकान तोड़ना है।”
मलबे में तब्दील हुआ गृहस्थी का सामान, भारी आर्थिक क्षति
जेसीबी मशीनों द्वारा की गई इस अचानक कार्रवाई के कारण ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घरों के भीतर रखा अनाज, कपड़े और गृहस्थी का कीमती सामान मलबे में तब्दील हो गया। पीड़ित परिवारों को इस कार्रवाई से न केवल भारी आर्थिक चपत लगी है, बल्कि वे गहरे मानसिक सदमे में हैं।
पीढ़ियों से काबिज आदिवासियों पर दमनकारी कार्रवाई गैर-कानूनी
ग्रामीणों ने बताया कि पीड़ित परिवार गोंड जनजाति (आदिवासी वर्ग) से ताल्लुक रखते हैं और पीढ़ियों से इस जमीन पर काबिज हैं। बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए या पुनर्वास (रहने की वैकल्पिक व्यवस्था) की व्यवस्था किए बिना इस तरह की दमनकारी कार्रवाई पूरी तरह से गैर-कानूनी और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
थाने में शिकायत, उग्र आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी
घटना को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने पाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ितों ने मांग की है कि:
- दोषी कर्मचारियों पर FIR: महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता करने वाले वन विभाग और पुलिस के दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
- तत्काल पुनर्वास: बेघर हुए आदिवासी परिवारों के लिए तुरंत रहने और सिर छुपाने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
- उचित मुआवजा: मलबे में तब्दील हुई गृहस्थी और तोड़े गए मकानों के नुकसान का आंकलन कर उचित क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाए।
ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उन्हें जल्द न्याय नहीं दिलाया, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।















