Thursday, February 12, 2026

कोरबा में गुटखा की कालाबाजारी का बड़ा खेल: 5 रुपये की राजश्री 7 में, थोक स्तर पर माल दबाने क आशंका

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कोरबा एवं अन्य जिलों शहर में इन दिनों गुटखा की कालाबाजारी खुलेआम जारी है। अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से ज्यादा कीमत पर गुटखा बेचे जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। 5 रुपये में बिकने वाली ‘राजश्री’ गुटखा की पुड़िया अब 7 रुपये में बेची जा रही है। इससे उपभोक्ताओं में नाराज़गी है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

पैकेट पर रेट कुछ और, बाजार में वसूली कुछ और
जानकारी के अनुसार, राजश्री गुटखा के बड़े पैकेट पर रिटेलर प्राइस 120 रुपये अंकित है। इसके बावजूद बाजार में खुदरा विक्रेताओं को अधिक दाम में माल दिया जा रहा है, जिसके चलते ग्राहक से भी तय दर से ज्यादा वसूली की जा रही है।

ग्राहकों का कहना है कि जब उत्पाद पर स्पष्ट रूप से कीमत लिखी है, तो उससे अधिक राशि वसूलना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

थोक विक्रेता और डिस्ट्रीब्यूटर
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ थोक विक्रेता और डिस्ट्रीब्यूटर जानबूझकर माल रोककर कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं। पहले बाजार में सप्लाई कम की जाती है, फिर बढ़ी हुई मांग का फायदा उठाकर माल ऊंचे दामों पर बेचा जाता है।

कुछ छोटे दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें पहले की तुलना में अधिक कीमत पर स्टॉक दिया जा रहा है। ऐसे में वे मजबूरी में ग्राहकों से 2 रुपये अतिरिक्त वसूल रहे हैं।

एक दुकानदार ने कहा, “हमें ही महंगा माल मिल रहा है। अगर हम MRP पर बेचें तो घाटा होगा।”

उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन
कानून के अनुसार किसी भी पैक्ड उत्पाद को उसकी अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक कीमत पर बेचना गैरकानूनी है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत यह दंडनीय अपराध है।

यदि थोक स्तर पर ही तय कीमत से ज्यादा में सप्लाई हो रही है, तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है और इसकी जांच सप्लाई चेन तक की जानी चाहिए।

प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
अब तक इस मामले में खाद्य एवं औषधि विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। शहरवासियों की मांग है कि थोक गोदामों में छापेमारी कर स्टॉक की जांच की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके।

आम जनता पर असर
हालांकि गुटखा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, लेकिन शहर में बड़ी संख्या में लोग इसका सेवन करते हैं। ऐसे में तय दर से अधिक कीमत वसूलना उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है। महंगाई के दौर में यह दो रुपये की बढ़ोतरी भी आम लोगों की जेब पर असर डाल रही है।

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