बिलासपुर। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित “यूनिटी मार्च” का मंच बीजेपी के भीतर उफनती खींचतान का केंद्र बन गया। केंद्रीय मंत्री तोखन साहू की अगुवाई में निकली इस रैली का उद्देश्य ‘एकता का संदेश’ देना था, लेकिन मंच पर ‘असहमति’ की तस्वीर उभर आई।
पहली पंक्ति में खड़े होने को लेकर टकराव
रैली की शुरुआत में ही प्रदेश मंत्री हर्षिता पांडे और बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के बीच फर्स्ट लाइन में खड़े होने को लेकर जोरदार नोकझोंक हो गई। दोनों ने अपने-अपने पद और प्रोटोकॉल का हवाला देकर आगे चलने की दावेदारी की। वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक और अन्य दिग्गजों को बीच-बचाव करना पड़ा।
भव्य आयोजन, विशाल भीड़ — लेकिन सुर्खियों में विवाद
मां काली मंदिर परिसर से शुरू हुई रैली में हजारों युवा शामिल हुए। ‘भारत माता की जय’ और ‘सरदार पटेल अमर रहें’ के नारों से शहर गूंज उठा। मुख्य मार्गों पर पुष्प वर्षा हुई, छात्रों ने 100 मीटर लंबा तिरंगा लेकर मार्च किया।
कार्यक्रम का समापन सबरी महाविद्यालय में हुआ, जहां स्वच्छता दीदियों का सम्मान किया गया और स्वदेशी अपनाने का संकल्प लिया गया। लेकिन इस पूरे आयोजन के बीच जो दृश्य सबसे चर्चित रहा, वह था—पहली पंक्ति में नेताओं की भिड़ंत।
राजनीतिक संकेत और आंतरिक शक्ति संतुलन
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह घटनाक्रम बीजेपी के भीतर बढ़ती नेतृत्व दावेदारी और स्थानीय शक्ति संतुलन की लड़ाई को उजागर करता है। जिस मंच को ‘एकता’ दिखाने के लिए चुना गया था, उसी मंच पर ‘प्रतिस्पर्धा’ ने पार्टी की आंतरिक स्थिति पर नए सवाल खड़े कर दिए।















