कोरबा। मिडिल ईस्ट संकट के मद्देनजर पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद ईंधन के उपयोग में कमी लाने का दावा किया जा रहा है। इधर सुशासन तिहार के तहत ब्लॉक व जिला स्तर पर शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में दर्जनों विभागीय वाहन का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा दूर दराज के इलाके में शिविर आयोजित होने के कारण आम लोग भी वाहन से ही पहुंच रहे हैं, जो चर्चा का विषय बनता जा रहा है। चर्चा है कि वनांचल क्षेत्र होने के कारण अधिकारी कर्मचारियों के लिए बिना वाहन शिविर स्थल तक पहुंचना व्यवहारिक तौर पर संभव नही है।शनिवार को सुशासन तिहार‘ के अंतर्गत कोरबा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम लेमरू में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए। यहां उनका उड़नखटोला उतरा। जन समस्या निवारण शिविर के कारण फिलहाल प्रशासनिक और निजी तौर पर डीजल पेट्रोल की खपत बढ़ गई है।
एक तरफ देश के प्रधानमंत्री ने डीजल पेट्रोल की सीमित उपयोग की अपील आम जनता से की है। चर्चा यह भी है कि पीएम ने खुद इसका पालन करते हुए अपने काफिले में वाहनों की संख्या केवल दो कर दी है। इस तरह उन्होंने ईंधन की खपत कम करने उदाहरण पेश किया है। दूसरी ओर प्रदेश के मुखिया ही देश के प्रधानमंत्री की अपील पर कोई खास तवज्जो नहीं दे रहे हैं। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि प्रदेश भर में चल रहे जन समस्या निवारण शिविर में मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से पहुंच रहे हैं। हेलीकॉप्टर में सैकड़ों लीटर तेल की खपत हो रही है। सीएम की अगुवानी के लिए शिविरों में बड़ी संख्या में अधिकारी और आम जनता भी पहुंच रहे हैं। शिविरों में वाहनों के काफिले देखे जा सकते हैं। कहा यह जा रहा है कि जिससे पेट्रोल डीजल की खपत बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जब देश में आपदा की स्थिति निर्मित हो सकती है। प्रधानमंत्री ने भी डीजल पेट्रोल बचाने की अपील की है, इसके बाद भी प्रदेश में सुशासन तिहार के नाम पर बड़ी मात्रा में डीजल पेट्रोल फूंकने का क्या अर्थ। लोग तो यह भी कह रहे हैं कि वर्तमान स्थिति में डीजल पेट्रोल की किल्लत कई क्षेत्रों में बनी हुई है। पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की भी लग रही है। ऐसे में हालात सामान्य होते तक सुशासन तिहार शिविरों को टाला जा सकता था, लेकिन प्रदेश सरकार ने फिलहाल ऐसा नहीं किया है। यही वजह है कि लोग कह रहे हैं कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। हालांकि प्रशासन ने जिलास्तर पर दावा किया है कि पेट्रोल डीजल की फिलहाल कोई कमी नहीं है, पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। मगर सच तो यह है कि कई पेट्रोल पंप नियमित आपूर्ति नहीं होने के कारण ड्राई हो चुके हैं।















