कोरबा, 08 जनवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन की रफ्तार आकांक्षी जिला कोरबा में बुरी तरह थम गई है। वजह साफ है सिंगल विलेज और मल्टी विलेज स्कीम के करीब 150 करोड़ रुपये पिछले 7 महीनों से अटके हुए हैं। इसके चलते “हर घर नल, हर घर जल” का दावा जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहा है। जिले के 703 गांवों में से अब तक सिर्फ 107 गांवों में ही नियमित नल से जलापूर्ति शुरू हो पाई है, जबकि शेष गांव आज भी टैंकर, कुएं और हैंडपंप के सहारे जीवन यापन कर रहे हैं। फंड की कमी के चलते ठेकेदारों ने काम आगे बढ़ाने से हाथ खड़े कर दिए हैं और कई योजनाएं अधर में लटक गई हैं।

कोरबा में जल जीवन मिशन की जमीनी तस्वीर
आकांक्षी जिला कोरबा में जल जीवन मिशन के तहत कुल 1095 योजनाएं स्वीकृत हैं, 458 गांव सिंगल विलेज स्कीम में 245 गांव एतमानगर मल्टी विलेज स्कीम में शामिल हैं। पीएचई विभाग अब तक दोनों योजनाओं में करीब 516 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है, इसके बावजूद योजनाएं पूर्ण नहीं हो सकी हैं।
सिंगल विलेज स्कीम की स्थिति
458 गांवों में से केवल 107 गांवों में जलापूर्ति। करीब 351 गांव अब भी नल जल से वंचित। यानी सिर्फ 23 प्रतिशत गांवों तक ही योजना पहुंच पाई।

60% काम, सिर्फ 30% भुगतान
पोंडी उपरोड़ा, कटघोरा और पाली ब्लॉक के 245 गांवों (करीब 3 लाख आबादी) के लिए स्वीकृत एतमानगर समूह जल प्रदाय योजना की स्थिति भी चिंताजनक है, कुल लागत 385.90 करोड़ रुपये। कार्य पूर्ण : 60 प्रतिशत। भुगतान सिर्फ 30 प्रतिशत (116 करोड़)। लंबित भुगतान 115 करोड़ रुपये। अनुबंध के अनुसार योजना फरवरी 2025 तक पूरी होनी थी, लेकिन भुगतान न होने से अब इसके कम से कम एक साल और लटकने के आसार हैं।
औचक निरीक्षण में कलेक्टर नाराज
शनिवार को नवपदस्थ कलेक्टर कुणाल दुदावत ने औचक निरीक्षण के दौरान धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए कार्यदायी संस्था मेसर्स विंध्या टेली लिंक्स लिमिटेड को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। हालांकि पड़ताल में साफ हुआ कि काम की धीमी रफ्तार की मुख्य वजह भारी बकाया भुगतान है।
150 करोड़ नहीं मिले तो हालात और बिगड़ेंगे
जिला कार्यालय में, सिंगल विलेज स्कीम 30 करोड़। मल्टी विलेज स्कीम 115 करोड़। कुल लंबित भुगतान : करीब 150 करोड़ रुपये। अंतिम भुगतान न होने से न तो पूर्णता प्रमाण पत्र जारी हो पा रहा है और न ही ठेकेदारों की 5 प्रतिशत सुरक्षा निधि लौटाई जा सकी है।
नीयत पर सवाल, जवाब का इंतजार
डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद इतने अहम मिशन में वित्तीय संकट ने केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जल्द फंड जारी नहीं हुआ, तो कर्ज में डूबी निर्माण एजेंसियों के आंदोलन और काम बंद करने की स्थिति बन सकती है। फिलहाल विभाग और ठेकेदारों को उम्मीद है कि सरकार समय रहते 150 करोड़ रुपये जारी कर जल जीवन मिशन को पटरी पर लाएगी। सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या “हर घर जल” का सपना साकार होगा या फाइलों में ही सूख जाएगा?















