मानिकपुर उरांव बस्ती में अवैध महुआ शराब का धंधा चरम पर, आबकारी विभाग की मिलीभगत पर सवाल…

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मानिकपुर क्षेत्र की उरांव बस्ती में अवैध महुआ शराब का कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि आबकारी विभाग की शह और मिलीभगत के चलते यहां यह अवैध व्यापार खुलेआम चल रहा है। कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है, जिससे अवैध कारोबारी और अधिक हौसले में हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सुबह चार बजे से ही बस्ती में महुआ प्रेमियों का जमघट लग जाता है, जो देर रात तक चलता रहता है। शराब पीने वालों के लिए बैठने, खाने और पार्सल की सुविधा तक उपलब्ध है। एक ग्रामीण ने नाम न बताने की शर्त पर कहा — यहां रोज़ हजारों रुपए की अवैध शराब बिकती है। बड़े कारोबारी आबकारी अमले से मिलकर सब संभाल लेते हैं, इसलिए किसी को डर नहीं रहता। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस कारोबार के पीछे एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जो हर स्तर पर अपना प्रभाव बनाए हुए है। जब कभी आबकारी या पुलिस विभाग की टीम जांच के लिए पहुंचती है, तो पहले से सूचना मिल जाने के कारण केवल छोटे दुकानदारों पर औपचारिक कार्रवाई कर दी जाती है। बताया जाता है कि इस दौरान मोटी रकम लेकर बड़े व्यापारियों को बचा लिया जाता है, जबकि छोटे विक्रेताओं को बलि का बकरा बना दिया जाता है। एक अन्य ग्रामीण ने कहा — इस शराबखोरी से कई घरों की हालत खराब हो गई है। महिलाएँ परेशान हैं, पर डर के कारण कोई खुलकर कुछ नहीं कहता। ग्रामीणों का कहना है कि इन अवैध गतिविधियों के कारण क्षेत्र में गृहकलह, हिंसा और अपराध की घटनाएँ बढ़ रही हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी से मांग की है कि मानिकपुर और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे इस अवैध महुआ शराब नेटवर्क पर सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ग्रामीण सामूहिक आंदोलन करेंगे।

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