नई दिल्ली। पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर आयोजित जनसभा में अदालत से राहत मिलने के बाद शक्ति प्रदर्शन किया। शराब नीति मामले में आरोपमुक्त होने के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम था। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक सभा में शामिल हुए।
केजरीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 10 वर्षों में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का एक भी ठोस सबूत नहीं मिला। उन्होंने अदालत के फैसले को “सत्य की जीत” बताते हुए न्यायपालिका का आभार जताया। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची गई।
उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि दिल्ली सरकार का कोई ठेकेदार या वेंडर यह साबित कर दे कि उन्होंने पैसे मांगे, तो वह राजनीति छोड़ देंगे। केजरीवाल ने युवाओं के मुद्दों, पेपर लीक की घटनाओं और महंगाई को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की।
सभा में दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने भी संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल को झूठे मामलों में फंसाया गया और इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली आगामी चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और समर्थकों को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है। जंतर-मंतर की यह सभा दिल्ली की राजनीति में नई सियासी हलचल लेकर आई है।















