कोरबा छत्तीसगढ़ 11 दिसंबर: -कुसमुंडा के इमलीछापर चौक पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण कार्य पिछले लगभग ढाई साल से रुका हुआ है। सबसे बड़ी बाधा, निर्माण क्षेत्र में आ रहे 11 मकानों को तोड़े जाने के लगभग छह महीने बाद भी, काम दोबारा शुरू नहीं हो सका है।
प्रशासन ने छह माह पहले बरसात के दौरान मकानों को खाली करवाकर ढहा दिया था, ताकि ओवरब्रिज का निर्माण तेजी से शुरू हो सके। हालांकि, जमीन खाली होने के बावजूद निर्माण एजेंसी राइट्स (RITES) का कोई अधिकारी अब तक काम शुरू कराने के लिए मौके पर नहीं पहुंचा है।
जनता की परेशानी बनी हुई है
राइट्स की यह सुस्ती और प्रशासन की अनदेखी लगभग 2 लाख की आबादी के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। इमलीछापर चौक से आवाजाही करने वाले कुसमुंडा, गेवरा-दीपका, भिलाई बाजार, हरदीबाजार, बांकीमोंगरा सहित आसपास के 25 गांवों के लोग प्रभावित हैं।
- हर 10 मिनट में बंद फाटक: इमलीछापर फाटक, कुसमुंडा थाना और खदान क्षेत्र को जोड़ता है। यहां गेवरा रोड स्टेशन से कोयला खदानों तक रेल लाइन गुजरी है, जिस पर 24 घंटे मालगाड़ियों का आवागमन होता है। इस वजह से फाटक औसतन हर 10 मिनट में बंद होता है, जिससे राहगीर घंटों फंसे रहते हैं। इसके अलावा, कुसमुंडा खदान से गुजरने वाले 1 हजार मालवाहक भी इसी फाटक से होकर गुजरते हैं।
- फाटक पर फंसने से बचने के लिए, कई लोग अतिरिक्त दूरी तय करके ग्राम कुचैना से रेलवे अंडरब्रिज के रास्ते थाना चौक की ओर जाते हैं।
आंदोलन की चेतावनी
कुसमुंडा क्षेत्र के पूर्व पार्षद अमरजीत सिंह ने बताया कि प्रशासन ने 21-22 जून को बरसात के बीच बिना मोहलत दिए मकान तोड़ दिए और लोगों को बेघर कर दिया, पर ओवरब्रिज का निर्माण शुरू नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित एजेंसी इस महीने काम शुरू नहीं करती है, तो क्षेत्रवासियों के साथ आंदोलन किया जाएगा।
पार्षद गीता गवेल ने भी इस देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रशासन को गंभीरता दिखाते हुए रुके हुए काम को तेजी से पूरा कराना चाहिए, अन्यथा अगली बारिश में समस्या और बढ़ जाएगी।
एसईसीएल के सीएसआर फंड से हो रहा निर्माण
यह ओवरब्रिज का काम एसईसीएल (SECL) के सीएसआर (CSR) मद के सहयोग से कराया जा रहा है, और निर्माण एजेंसी राइट्स है।
- ओवरब्रिज का आधा-अधूरा काम इमलीछापर चौक के दोनों ओर हो चुका है।
- अब रेलवे फाटक के पास रेलवे लाइन के ऊपर के हिस्से में निर्माण होना है।
- 11 मकानों को तोड़ने के बाद अब जो जमीन खाली हुई है, वहीं पर ओवरब्रिज के पिलर बनने हैं।
पीडब्ल्यूडी (PWD) भी एसईसीएल के सीएसआर मद से ही कोरबा-पश्चिम के इमलीछापर चौक से कुचैना मोड़ तक फोरलेन बनाने का काम करेगा।















