शहर में गृहिणियां और युवा मिलकर रोटी बैंक सेवा चला रहे हैं. ताजा रोटियों को कैसे जरूरतमंदों तक पहुंचाते हैं.
कोरबा: जिले में 6-7 सालों से एक रोटी बैंक चलाया जा रहा है. कुछ युवा और गृहणियां मिलकर इस बैंक को चला रही हैं. जरूरतमंदों को रोटी देने के लिए इसे 2018 में शुरू किया गया था जो अब बड़े स्तर तक पहुंच गया है. दिन भर में इस बैंक में 600 रोटियां कलेक्ट हो जाती हैं.

कैसे आया आइडिया: रोटी बैंक के प्रभारी शिवा चौहान बताते हैं कि, काफी समय पहले एक महिला को देखा था, जिसने 8 दिन से खाना नहीं खाया था. हमारी नजर उस पर पड़ी और हमने उसे भोजन कराया. विचार आया कि ऐसे कितने ही लोग होंगे. जिन्हें दो वक्त खाना भी हासिल नहीं हो पता. तभी से हमने ऐसे लोगों को ढूंढ कर उन्हें खाना खिलाने का फैसला किया. छत्तीसगढ़ हेल्प वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक राणा मुख़र्जी इस संस्था के अध्यक्ष हैं.

कैसे काम करता है ये बैंक: इस संस्था का अलग से कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है. सिर्फ एक व्हाट्सएप्प ग्रुप है, ये बैंक उसी ग्रुप में मैसेजेस के माध्यम से चलता है. जिसका नाम रोटी बैंक सेवा है. इसमें कोरबा की कुछ महिलाएं जो गृहिणी हैं वो जुड़ी हैं. इसके अलावा कुछ युवा जैसे मिहिर, सूर्या चौहान, हेमंत निषाद, गोलू नारायण और विशेष यादव इसमें शामिल हैं. इस ग्रुप में सिर्फ मैसेज डाल दिया जाता है और फिर कुछ देर बाद घर-घर पहुंचकर रोटी कलेक्ट की जाती है
रोटी कलेक्शन की तस्वीरें देखिए

2019 से रोटी बैंक से जुड़े हैं. उसी समय से लगातार सेवा दे रहे हैं. शुरू से सुने कि हम एक-एक रोटी दान दे सकते हैं. हम गृहिणी है, हमारी भी इच्छा होती है समाज की सेवा करने की. इससे अच्छा और कोई मौका नहीं मिल सकता. हम रोटी देकर सेवा कर सकते हैं तो हमारे लिए ये सबसे बढ़िया है-रजनी देवांगन, गृहिणी
सब कुछ पहले ही होता है तय: ग्रुप में अब महिला समिति की कई सदस्य और शहर के काफी सारे लोग जुड़े हुए हैं. ऐसे में किस दिन कौन रोटी देगा ये तो तय रहता ही हैं साथ ही अलग-अलग दिन के हिसाब से रोटियों को दान करने का इलाका भी तय किया जाता है. ग्रुप के कुछ युवा मैसेज कर देते हैं. इसके बाद लोग अपने घरों में रोटी पकाकर तैयार रखते हैं. पहले ताजा रोटी कलेक्ट कर रोटी बैंक तैयार किया जाता है. जिसे लेकर युवा बाइक से अलग-अलग दिशाओं में जरूरतमंदों की भूख मिटाते हैं.
रोटी सेवा हम दोनों टाइम करते हैं. दोपहर में और इसके बाद शाम को. रोटी कलेक्ट करने के बाद हम मंदिर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, झोपड़ी जैसे इलाकों में जाकर जरूरतमंदों को रोटी प्रदान करते हैं. इन्हें हम प्रभुजन कहते हैं– शिवा प्रतीक चौहान, प्रभारी

रोटी-अचार से शुरू अब सब्जी भी: युवा बताते हैं कि, हमारा यह सफर पहले तो अचार और रोटी से शुरू हुआ था. लेकिन अब हम रोटी के साथ सब्जी भी परोसते हैं. एक दिन में दोनों टाइम को मिलाकर लगभग 600 रोटी का बैंक तैयार करते हैं. दोपहर में 12 से 2 और शाम को 6 से 7 यह दो ऐसा समय होता है. जब युवा अपनी टर्न ने अनुसार रोटी बैंक का काम करते हैं.

शहर के इन इलाकों पर ज्यादा फोकस
- सर्वमंगला मंदिर
- शनि मंदिर से लेकर रेलवे स्टेशन
- बस स्टैंड
- झोपड़ी वाले इलाके
- रेलवे स्टेशन
- या जरूरतमंद जहां मिलें
नेक नीयत से सेवा करने की सोची जाए तो कोई ना कोई तरकीब मिल ही जाती है. रोटी बैंक के युवाओं को अपनी ओर आता देख जरूरतमंद लोग अपने घर से बर्तन लाकर उनका इंतजार करते हैं. यह सभी उन्हें आशीर्वाद देते हैं. कम से कम उनके लिए दो वक्त के भोजन का इंतजाम करने वाले ये युवा उनके लिए किसी देवदूत की तरह ही हैं.















