अमित जोगी को उम्रकैद: मुख्यमंत्री बोले, हाईकोर्ट का निर्णय स्वागतयोग्य, पढ़िये किस तरह से घटी थी घटना

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रायपुर  6 अप्रैल 2026|छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी अमित जोगी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 2 अप्रैल को हुई सुनवाई के बाद सामने आया, जिसकी विस्तृत ऑर्डर कॉपी अब जारी की गई है।

इस फैसले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाईकोर्ट का निर्णय स्वागतयोग्य है। उन्होंने कहा, “यह मामला भले ही देर से सुलझा, लेकिन न्याय मिला—देर आए, दुरुस्त आए।” मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अमित जोगी की भूमिका एक मुख्य आरोपी के रूप में सामने आई है और न्यायालय का फैसला कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करता है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय तथ्यों और साक्ष्यों के विपरीत था। हाईकोर्ट ने उपलब्ध सबूतों, गवाहों के बयानों और पूरे घटनाक्रम का गहन विश्लेषण करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि यह हत्या एक सुनियोजित साजिश का परिणाम थी।

कोर्ट के अनुसार, वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव से पहले एनसीपी की प्रस्तावित रैली को विफल करने के लिए एक बड़ी साजिश रची गई थी। इस साजिश के तहत रायपुर के ग्रीन पार्क होटल और मुख्यमंत्री निवास में कई महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में रैली को हर हाल में रोकने के लिए कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया गया था।

4 जून 2003 की रात इस साजिश को अंजाम दिया गया। आरोपियों ने रामावतार जग्गी की कार का पीछा किया, उन्हें रास्ते में रोका और गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए और बाद में एक स्थान पर इकट्ठा होकर घटना की पुष्टि की।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रारंभिक पुलिस जांच में वास्तविक आरोपियों को बचाने और कुछ निर्दोष लोगों को फंसाने की कोशिश की गई थी। हालांकि बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में पूरे षड्यंत्र का खुलासा हुआ और मामले की सच्चाई सामने आई।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि इतनी बड़ी और सुनियोजित साजिश किसी प्रभावशाली व्यक्ति की सक्रिय भूमिका के बिना संभव नहीं हो सकती। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य और परिस्थितियां अमित जोगी की संलिप्तता को पूरी तरह सिद्ध करती हैं।

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