Tuesday, February 17, 2026

कोरबा: स्वास्थ्य केंद्र में लापरवाही चरम पर, घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिल रही स्वास्थ्य सेवाएं,देखिए विडिओ

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कोरबा। जिले के धनराज कुमार देवी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां इलाज के लिए सुबह से कतार में खड़े महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारी और कर्मचारी नदारद हैं।

स्वास्थ्य केंद्र का निर्धारित समय सुबह 8:45 बजे का है, बावजूद इसके न तो डॉक्टर समय पर पहुंचते हैं और न ही अन्य स्वास्थ्यकर्मी। आमजन सुबह 8:00 बजे से ही कतार में खड़े हो जाते हैं, लेकिन 10:00 बजे तक भी न डॉक्टर नजर आते हैं, न ही कोई अन्य जिम्मेदार कर्मचारी।

स्थानीय लोगों की मानें तो यह स्थिति रोज की है, जिससे लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीजों को बिना जांच और दवा के वापस लौटना पड़ रहा है। जिनका इलाज होता भी है, उनके लिए या तो दवाइयाँ उपलब्ध नहीं होतीं या फिर बाहर की मेडिकल दुकानों से दवा खरीदने की सलाह दी जाती है, जिससे निजी मेडिकल व्यवसाय को बढ़ावा मिल रहा है।

एक ओर सरकार स्वास्थ्य विभाग के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। आज भी पुरानी टेक्नोलॉजी और सुस्त प्रक्रिया के जरिए एक्स-रे एवं अन्य जांच की जा रही है। कहीं मेडिसिन उपलब्ध नहीं, तो कहीं इलाज के लिए मरीजों को जिला अस्पताल भेज दिया जाता है।

यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि स्वास्थ्य विभाग में सुधार कब होगा और आम जनता को सही समय पर, बेहतर इलाज कब मिलेगा? ज़रूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान दें और जनता को उनके हक का स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराएं।

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भयानक खतरे की ओर बढ़ता गीतांजलि भवन, कोरबा – प्रशासन की अनदेखी से हजारों जानें जोखिम में,देखिए विडिओ

कोरबा, 18 जुलाई: कोरबा शहर के हृदयस्थल में स्थित गीतांजलि भवन, जो करीब 40 साल पुराना है, अब एक गंभीर खतरे का केंद्र बन चुका है। भवन की जर्जर स्थिति और नींव की कमजोरी ने इसे किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बना दिया है। स्थानीय व्यापारियों द्वारा भवन की संरचना से छेड़छाड़ ने स्थिति को और भी चिंताजनक बना दिया है।

भवन की हालत चिंताजनक

जानकारी के अनुसार, गीतांजलि भवन की दीवारें और कॉलम अब बेहद कमजोर हो चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई दुकानदारों ने दुकानों के बीच की दीवारें तक गिरा दी हैं, जिससे भवन की नींव पर सीधा असर पड़ा है। बिना किसी तकनीकी अनुमति के की गई ये तोड़फोड़ न केवल अवैध है, बल्कि हजारों लोगों की जान के लिए खतरा भी बन चुकी है। शासन प्रशासन द्वारा गरीबो के बेजा कब्जा को हटाया जा रहा है किन्तू अमीरो द्वारा किये गये कब्जा को क्यो नही हटाया जाता।

प्रशासन का मौन क्यों?

स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद भी प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। आरोप हैं कि कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव के चलते कार्यवाही से बच रहे हैं। यह लापरवाही आने वाले समय में किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है।

समाधान की मांग

स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों की ओर से प्रशासन और सरकार से मांग की गई है कि:

तत्काल सुरक्षा मूल्यांकन कराया जाए।

भवन का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।

जिम्मेदार अधिकारियों और दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।


जनता की अपील

नागरिकों का कहना है कि अब समय आ गया
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