गरियाबंद।
जहां आमतौर पर ट्रैफिक पुलिस का नाम सुनते ही चालान और कार्रवाई की छवि सामने आती है, वहीं गरियाबंद पुलिस ने एक अलग और सराहनीय पहल कर मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। 29वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत गरियाबंद पुलिस ने दोपहिया वाहन चालकों को रोककर चालान नहीं, बल्कि गुलाब का फूल देकर हेलमेट पहनने की अपील की।
शुक्रवार को शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर यातायात पुलिस ने बाइक चालकों से विनम्रता के साथ कहा—
“पुलिस के डर से नहीं, अपनी जान और अपनों की खुशियों के लिए हेलमेट पहनिए।”
इस अनोखे अंदाज़ ने लोगों का दिल जीत लिया और देखते ही देखते माहौल मुस्कान और भरोसे से भर गया।
हेलमेट पहनने वालों को ‘थैंक यू’, न पहनने वालों को मुफ्त हेलमेट
सड़क सुरक्षा माह के दूसरे दिन डीएसपी लितेश सिंह के नेतृत्व में यातायात पुलिस ने रायपुर रोड, पुराने एसपी कार्यालय के सामने विशेष अभियान चलाया। हेलमेट पहनकर वाहन चला रहे लोगों को गुलाब का फूल भेंट कर “थैंक यू” कहा गया, जबकि बिना हेलमेट पकड़े गए युवाओं को मौके पर ही हेलमेट पहनाया गया। कुछ जरूरतमंद चालकों को मुफ्त हेलमेट भी वितरित किए गए।
पुलिस के डर से नहीं, अपनों की खातिर पहनें हेलमेट- डीएसपी लितेश सिंह
डीएसपी लितेश सिंह ने कहा—
“हमारा उद्देश्य चालान काटना नहीं, जीवन बचाना है। हेलमेट एक छोटा सा सुरक्षा कवच है, जो सड़क हादसों में अनमोल जान बचा सकता है।”
युवाओं को दी गई जीवन की सीख, माता-पिता से भी अपील
पुलिस अधिकारियों ने युवाओं से यातायात नियमों का पालन करने और अपने दोस्तों को भी प्रेरित करने की अपील की। साथ ही अभिभावकों से आग्रह किया गया कि वे अपने बच्चों को बिना हेलमेट बाइक चलाने की अनुमति न दें।
उन्होंने कहा—
“यातायात नियमों का पालन सिर्फ आपकी सुरक्षा नहीं, बल्कि आपके परिवार की खुशियों की रक्षा भी करता है। शराब पीकर वाहन न चलाएं, ओवरस्पीडिंग से बचें और हमेशा सतर्क रहें।”
एसपी वेदव्रत सिरमौर के निर्देश पर चला अभियान
शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए एसपी वेदव्रत सिरमौर के निर्देश पर यह विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। यातायात प्रभारी रामा धार मरकाम सहित पूरी टीम ने नियमों की जानकारी देकर लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित किया।
गुलाब ने तोड़ा डर, भरोसे ने जोड़ा रिश्ता
गरियाबंद पुलिस की यह पहल साबित करती है कि कानून का पालन केवल सख्ती से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और संवाद से भी कराया जा सकता है।
गुलाब के एक फूल ने लोगों को यह एहसास दिलाया कि पुलिस सिर्फ कानून की रखवाली नहीं करती, बल्कि उनकी जिंदगी की भी फिक्र करती है।















