Thursday, February 12, 2026

दो तहसीलदार गिरफ्तार : करोड़ों के भू अधिग्रहण घोटाले पर बड़ा एक्शन, कोर्ट ने दी पुलिस रिमांड

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छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत हुए कथित भूमि अधिग्रहण घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और तत्कालीन नायब तहसीलदार को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

रायपुर 11 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना से जुड़े बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण घोटाले में जांच एजेंसियों को अहम कामयाबी मिली है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की संयुक्त टीम ने लंबे समय से फरार चल रहे दो वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों — तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और तत्कालीन नायब तहसीलदार — को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों की गिरफ्तारी को इस पूरे प्रकरण में एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है।

कोर्ट ने दी पुलिस रिमांड

गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने दोनों अधिकारियों को विशेष न्यायालय में पेश किया। EOW/ACB की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि मामले की गंभीरता, वित्तीय लेन-देन की जटिलता तथा महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी के लिए आरोपियों से विस्तृत पूछताछ आवश्यक है। एजेंसी ने आरोपियों की कस्टडी की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए दोनों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया।जांच एजेंसियों का मानना है कि रिमांड अवधि के दौरान कई अहम जानकारियाँ सामने आ सकती हैं, जिनसे पूरे घोटाले की परतें खुलने की संभावना है।

क्या है पूरा मामला

भारतमाला परियोजना, जो देश की एक प्रमुख सड़क अवसंरचना योजना है, के तहत विभिन्न क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण किया गया था। इसी प्रक्रिया के दौरान मुआवजे के वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए। आरोप है कि कुछ राजस्व अधिकारियों ने कथित रूप से मिलीभगत कर भूमि रिकॉर्ड में हेराफेरी की।

जांच में सामने आया कि निजी भूमि और सरकारी जमीनों के दस्तावेजों में बदलाव कर अपात्र व्यक्तियों को करोड़ों रुपये का मुआवजा दिलाया गया। आरोप यह भी है कि इस पूरी प्रक्रिया में कमीशनखोरी और संगठित भ्रष्टाचार का खेल चल रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर जमीनों की प्रकृति बदलने, फर्जी दावेदार तैयार करने और मुआवजा राशि के अनुचित भुगतान जैसी गंभीर अनियमितताएँ की गईं।

इस प्रकरण में पूर्व में कई पटवारी, बिचौलिए और अन्य संबंधित व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। शशिकांत कुर्रे और नायब तहसीलदार की गिरफ्तारी को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

फरारी और गिरफ्तारी की कहानी

मामला दर्ज होने के बाद से ही दोनों अधिकारी जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर थे। EOW की टीम लगातार उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी। सूत्रों के अनुसार, तकनीकी इनपुट, निगरानी और मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर जांच एजेंसी ने सटीक कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में लिया।जांच एजेंसियों का कहना है कि फरारी के दौरान आरोपियों की गतिविधियों और संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

जांच में और खुलासों की उम्मीद

EOW/ACB के अधिकारियों के अनुसार, यह मामला अत्यंत संवेदनशील और व्यापक प्रभाव वाला है। पुलिस रिमांड के दौरान वित्तीय लेन-देन, बैंकिंग ट्रेल, दस्तावेजी साक्ष्य तथा अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच की जाएगी।

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