मुआवजे और भेदभाव के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे अमगांव के ग्रामीण, मृत मवेशियों के साथ SECL कार्यालय के घेराव की दी चेतावनी,देखिए विडिओ

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गेवरा/कोरबा:-
एस.ई.सी.एल. (SECL) गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अमगांव के रोहिदास मोहल्ला के दलित परिवारों ने प्रबंधन पर गंभीर भेदभाव और हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए उग्र आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है पिछले 3 वर्षों से लंबित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आज मुख्य महाप्रबंधक (CGM) को ज्ञापन सौंपकर सात दिनों का अल्टीमेटम दिया है ।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी भूमि और संपत्तियों का अर्जन वर्ष 2004 में ही किया जा चुका है वर्ष 2023 में मूल्यांकन और नापी की प्रक्रिया पूरी कर पावती भी दी जा चुकी है लेकिन प्रबंधन द्वारा जानबूझकर भुगतान रोका गया है ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मोहल्ले के अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को मुआवजा और बसाहट की सुविधा मिल चुकी है लेकिन रोहिदास समुदाय (दलित वर्ग) के परिवारों को इससे वंचित रखा गया है यह सीधे तौर पर जातिगत आधार पर शोषण का मामला है उन्होंने बताया है कि इससे पहले भी इस ग्राम पंचायत के 124 परिवारों को भी अपात्र बताकर मुआवजा से वंचित करने का प्रयास किया जा चुका है ।

उन्होंने बताया कि एसईसीएल के अधिकारी बता रहे हैं कि वर्ष 2023 में मूल्यांकन टीम ने नापी सर्वे किया था जिसमे 30 परिवार के मकान शामिल था और यह मुहल्ला अमगांव का है या हरदीबाजार का इसकी जांच के लिए राजस्व विभाग के पास लंबित है जब तक तहसील कार्यालय से आदेश जारी नही किया जाता आगे की प्रक्रिया पूरी नही किया जा सकता इस तरह से एसईसीएल और एसडीएम कार्यालय के बीच एक दूसरे के पाले में गेंद खेली जा रही है और उनका समस्या का समाधान नही हो रहा है उन्होंने आरोप लगाया कि केवल हम दलितों के साथ ही ये भेदभाव किया जा रहा बाकी अन्य लोंगो को उनका मुआवजा और पुनर्वास प्रदान कर दिया गया है ।

प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन यह नही चाहती कि हम अपने परम्परागत कार्य से ऊपर उठकर कुछ कार्य सकें इसलिए हम अब आंदोलन की राह में जाने के लिए मजबूर हैं यदि एक सप्ताह के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं तो ग्रामीण अपने पैतृक व्यवसाय (चर्म कार्य) के प्रतीक स्वरूप मृत मवेशियों के साथ SECL गेवरा कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करेंगे ।

ग्रामीणों ने इस आंदोलन की सूचना जिला कलेक्टर (कोरबा) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व पाली) और थाना प्रभारी (दीपका) को भी प्रेषित कर दी है ।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि आंदोलन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति स्वास्थ्य संबंधी समस्या या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की संपूर्ण जिम्मेदारी SECL प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी ।

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