रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपने गृह ग्राम बीरपुर में आयोजित प्रकृति के पावन पर्व करमा पूजा में शामिल हुईं। उन्होंने ग्रामीणजनों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान से करम देव की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख, शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।करमा पूजा के अवसर पर पूरा गांव पारंपरिक रंग में रंगा नजर आया। लोकगीत, संगीत और नृत्य के साथ ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक पर्व मनाया। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने भी ग्रामीणों के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं और करमा पूजा की शुभकामनाएं दीं।

प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिकता का पर्व
करमा पर्व छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और ग्रामीण जनजीवन से गहराई से जुड़ा पारंपरिक त्योहार हैं। यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता,लोक आस्था और सामुदायिक एकता का संदेश देता हैं। करम देव की पूजा के माध्यम से ग्रामीणजन अच्छी फसल,परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, तीज-त्योहारों और प्रकृति से जुड़े पर्वों से हैं। करमा जैसे लोकपर्व हमें अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करते हैं। इनमें प्रकृति के प्रति सम्मान, आपसी भाईचारे और सामूहिकता की भावना दिखाई देती हैं।

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना जरूरी
मंत्री ने कहा कि लोकसंस्कृति और पारंपरिक पर्व केवल उत्सव मनाने का माध्यम नहीं हैं,बल्कि ये हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इन परंपराओं को जीवंत बनाए रखना और नई पीढ़ी को इनके महत्व से परिचित कराना सभी की जिम्मेदारी हैं।उन्होंने युवाओं और बच्चों से अपनी संस्कृति, लोककलाओं और पारंपरिक पर्वों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,कि जब नई पीढ़ी अपनी लोकपरंपराओं को समझेगी और उनसे जुड़ेगी,तभी सांस्कृतिक विरासत आगे भी मजबूती से संरक्षित रह सकेगी।

ग्रामीणों ने किया आत्मीय स्वागत
करमा पूजा में शामिल होने पहुंचीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का ग्रामीणजनों ने आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से संवाद भी किया और पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश की निरंतर प्रगति तथा सभी परिवारों के सुख-समृद्धि की कामना की।करमा पूजा के आयोजन में ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं और प्रकृति से जुड़े सांस्कृतिक मूल्यों की जीवंत झलक प्रस्तुत की।

















