Saturday, February 14, 2026

कोरबा – अपने ही कर्मचारियों को पानी नहीं दे पा रही है SECL

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5 दिनों से पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं कॉलोनीवासी, “आक्रोश” आंदोलन की राह पर

*जिम्मेदारी से SECL कंपनी में ड्यूटी निभा रहे हैं कर्मचारी, लापरवाह प्रबंधन अपने ही कर्मचारियों के परिवारों को नहीं दे पा रहे हैं सुविधा:- संतोष चौहान प्रदेशाध्यक्ष (छत्तीसगढ़ ठेका कामगार यूनियन)

*गेवरा//कोरबा:
साउथ ईस्ट कोलफील्ड लिमिटेड एसईसीएल गेवरा क्षेत्र अनुष्गा कंपनी के कर्मचारी और उनके परिवार 5 दिनों से पानी की समस्या से परेशान व जूझ रहे हैं पानी की विकराल समस्या को लेकर कईयों बार पत्राचार के माध्यम से कंपनी के मुख्य कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर मौखिक तौर व सड़क की संघर्ष करके एसईसीएल प्रबंधन को अवगत कराया जा चुका है लेकिन लापरवाह प्रबंधन अपने ही कर्मचारियों के परिवारों को पानी की समस्या से सुविधा दिलाने में नाकाम हो रही है कर्मचारी और परिवार के लोग नाराज व आक्रोशित हैं कभी भी हो सकता है बड़ा आंदोलन इसके जिम्मेदार स्वयम गेवरा क्षेत्र के एसईसीएल प्रबंधन होंगे ।

गौरवतलब है कि अनुष्गा कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी दिन-रात मेहनत करके कंपनी और देश को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं लेकिन वही दूसरी तरफ कंपनी के प्रबंधन लाखों-करोड़ों रुपया कॉलोनी की मेंटेनेंस साफ सफाई बिजली सप्लाई पानी सप्लाई और अन्य कामों के नाम पर खर्च किया जा रहा है कर्मचारियों और उनके परिवार के सुविधा के नाम पर खानापूर्ति ही हो रही है और लाखों-करोड़ों खर्च करने के बावजूद भी सुविधा नहीं दे पा रही है तो लाजमी सी बात है सवाल जरूर खड़े होते हैं प्रबंधन अपने ही कर्मचारियों और उनके परिवार पानी की सुविधा नहीं दे पा रहे हैं लाखों करोड़ों रुपया मेंटेनेंस के नाम से फूक जा रहा है अच्छी से अच्छी सुविधा ऊर्जानगर कॉलोनी के अलावा कई वार्डों के कॉलोनी स्थानों पर पानी की विकराल समस्या बनी हुई है कई ऐसे वार्डों के कॉलोनी है जहां महिनो से पानी की किल्लत से जूझ व परेशान हो रहे हैं जिसके कारण कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों के परिवार में खासी नाराजगी और आक्रोश है कभी भी बड़ा आंदोलन हो सकता है ।

छत्तीसगढ़ ठेका कामगार यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष चौहान ने जारी प्रेस बयान में बताया है कि एसईसीएल गेवरा प्रबंधन एक तो अपने ही कर्मचारी के परिवारों को ठीक ढंग से सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं और अच्छी से अच्छी सुविधा देने के नाम पर लाखों-करोड़ों का कंपनी व देश को चूना लगा रहे हैं लेकिन वहीं दूसरी ओर भूविस्थापितों को पूरी व्यवस्थाओं के साथ मुआवजा रोजगार बसाहट पुर्नवास की व्यवस्था के नाम पर मामलों व प्रकरणों को लटकाए अटकाया जा रहा है इस वजह से कोयला खदानों के विस्तार पर जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण देश के विकास में एसईसीएल के प्रबंधन उनके अधिकारी रोड़ बंन कर बैठे हुए हैं चौहान ने आगे कहा कि कई खदान बंद होने के कगार पर है पानी की समस्या खदान प्रभावित ग्रामों में सबसे ज्यादा है पानी की उत्तम से उत्तम व्यवस्था के लिए प्रबंधन प्रतिवर्ष लाखों-करोड़ों का टेंडर इशू किया जाता है ना ग्रामों में पानी ठीक से मिल पाती है और ना ही अपने ही कर्मचारियों के परिवारों को पानी उपलब्ध करने में असफल साबित हो रही हैं नाराज व आक्रोशित कर्मचारियों के परिवारों और प्रभावित ग्रामों के साथ उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसकी उनकी स्वयं की जिम्मेदारी होगी ।

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