कोरबा। मानिकपुर ओपन कास्ट कोयला परियोजना के विस्तार को लेकर एक बार फिर भू-विस्थापितों के लंबित अधिकारों का मुद्दा सामने आया है। 25 सितंबर को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले प्रभावित ग्रामीणों ने मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और पुनर्स्थापन सहित वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण की आवाज उठाई है।
इसी मुद्दे को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि परियोजना का विस्तार हो, लेकिन जिन परिवारों की जमीन, मकान और आजीविका प्रभावित हो रही है, उनके अधिकारों और भविष्य की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
ग्रामीणों की ओर से लंबित मुआवजा, पात्र परिवारों को रोजगार, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन, छूटे हुए मकानों और परिवारों का पुनः सर्वेक्षण जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता न बने, बल्कि प्रभावित परिवारों की आपत्तियों और समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए।
मानिकपुर परियोजना की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 5.25 से बढ़ाकर 7.0 MTPA किए जाने की प्रक्रिया के बीच पुराने भू-विस्थापितों के लंबित मामलों को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि मानिकपुर खदान का विस्तार आगे बढ़ेगा, तो वर्षों से लंबित पुराने विस्थापितों के मुआवजे, रोजगार और पुनर्वास के मामलों का समाधान कब होगा?
JB News Korba | Manish Jaiswal

















