बिलासपुर/कोरबा। छग हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायाधीश बिभु दत्त गुरु की डबल बेंच ने कोरबा निवासी सूरज हथेल की मौत के मामले में राज्य सरकार को 2 लाख रुपये मुआवजा राशि याचिकाकर्ता माँ को देने का आदेश जारी किया है। डबल बेंच ने कहा है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों यानी जीवन के अधिकार के उल्लंघन के लिए मौद्रिक मुआवजा दिया जाना चाहिए।
कोरबा जिले के विभिन्न थानों में कई आपराधिक व गंभीर मामलों के आदतन बदमाश सूरज हथेल की मौत के मामले में याचिकाकर्ता मॉं प्रेमा हथेल पत्नी स्वर्गीय सुरेश हथेल,49 वर्ष निवासी बुधवारी बाजार, कोरबा बनाम प्रतिवादियों- छत्तीसगढ़ राज्य सचिव, गृह और पुलिस मामले, महानदी भवन, नया मंत्रालय,रायपुर, पुलिस महानिदेशक, पुलिस मुख्यालय रायपुर,।पुलिस अधीक्षक कोरबा, मुख्य पुलिस अधीक्षक कोरबा, कलेक्टर कोरबा,अनुविभागीय दंडाधिकारी, कोरबा, थाना प्रभारी पुलिस थाना सिविल लाइन रामपुर, कोरबा के मामले में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुना गया।
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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अंशुल तिवारी व प्रतिवादी/राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने अपने-अपने पक्ष रखे।
इस रिट याचिका के माध्यम से याचिकाकर्ताओं ने हिरासत में हुई मौत की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी को निर्देश देने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट, संबंधित पुलिस स्टेशनों से सीसीटीवी फुटेज और याचिकाकर्ता को अन्य संबंधित दस्तावेज तुरंत उपलब्ध कराने तथा अपने बेटे की हिरासत में हुई मौत के लिए सार्वजनिक कानून उपाय के तहत याचिकाकर्ता को पर्याप्त मौद्रिक मुआवजा देने की गुहार लगाई।
याचिकाकर्ता के वकील ने प्रस्तुत किया कि यह हिरासत में मौत का मामला है, हालांकि न्यायिक जांच रिपोर्ट के अनुसार,मृतक की मृत्यु मायोकार्डियल इंफेक्शन के कारण हुई क्योंकि वह कोरोनरी धमनियों की बीमारी से पीड़ित था। याचिका के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।
डबल बेंच ने दोनों पक्षों के वकील को सुनाऔर रिट याचिका के साथ संलग्न दस्तावेजों का अवलोकन किया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा समर्थन में प्रस्तुत विभिन्न न्याय दृष्टांतों के मुताबिक राज्य अपने कर्मचारियों के अत्याचारपूर्ण कृत्यों के लिए जिम्मेदार है और मुआवजे के भुगतान के लिए उत्तरदायी है। यह स्थापित कानून है कि सार्वजनिक कानून के क्षेत्र में मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए मुआवजा दिया जा सकता है।
डबल बेंच ने दिए यह आदेश
चीफ जस्टिस व न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि- तथ्य और कानून की स्थिति के अनुसार, हमें यह मानने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि याचिकाकर्ता, जो मृतक सूरज हथेल की मां है, अपने बेटे की गलत तरीके से हुई हानि के लिए मुआवजे की हकदार है और राज्य उन कर्मचारियों का नियोक्ता होने के नाते, जिनकी लापरवाही के कारण मृतक की मृत्यु हुई, याचिकाकर्ताओं को ऐसा मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है।मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, विशेष रूप से इस तथ्य को कि राज्य के कर्मचारियों की ओर से लापरवाही के कारण 27 वर्ष की आयु में मृतक सूरज हथेल की असामयिक मृत्यु के कारण याचिकाकर्ता ने संपत्ति, प्यार और स्नेह और निर्भरता खो दी है, हम प्रतिवादी-राज्य को आठ सप्ताह की अवधि के भीतर याचिकाकर्ता को 2,00,000/- (दो लाख रुपये) का मुआवज़ा देने का निर्देश देते हुए परमादेश की रिट जारी करने के लिए इच्छुक हैं। इस आदेश की तिथि से, ऐसा न करने पर इस राशि पर इस आदेश के पारित होने की तिथि से 9% प्रति वर्ष की दर से ब्याज लगेगा। सचिव, गृह एवं पुलिस मामले, छत्तीसगढ़ सरकार या पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ निर्धारित समय सीमा के भीतर दिए गए मुआवजे का भुगतान सुनिश्चित करेंगे। परिणामस्वरूप, रिट याचिका ऊपर बताई गई सीमा तक स्वीकार की जाती है।
रजिस्ट्रार (न्यायिक) को इस आदेश की एक प्रति सचिव, गृह एवं पुलिस मामले, छत्तीसगढ़ सरकार, रायपुर और पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़, रायपुर को तत्काल भेजने का निर्देश जारी किया गया है।















