❤️ 18 साल के संघर्ष के बाद चौपाटी में नई शुरुआत! 🎤 कलाकार संजय नार्डे की कहानी ने छू लिया दिल,देखिए विडिओ

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जाकिर हुसैन और दिलीप सारंगी जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करने वाले संजय नार्डे आज पिज्जा-बर्गर का स्टॉल लगाकर चला रहे हैं अपना परिवार। कोरबा चौपाटी में मिली नई जगह और सुरक्षा व्यवस्था से खुश हैं दुकानदार।

📺 JB News Korba | छत्तीसगढ़ | मनीष जायसवाल

कोरबा। जिंदगी में संघर्ष करने वाले इंसान की कहानी कभी-कभी दिल को भीतर तक छू जाती है। कोरबा की चौपाटी में हमारी मुलाकात एक ऐसे कलाकार से हुई, जिन्होंने संगीत की दुनिया में कई वर्षों तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। जाकिर हुसैन और दिलीप सारंगी जैसे नामचीन कलाकारों के साथ काम करने वाले संजय नार्डे आज एक छोटे-से फास्ट फूड स्टॉल के जरिए अपने जीवन की नई शुरुआत कर रहे हैं।

उनके स्टॉल का नाम है ‘Chatak मटक’, जहां पिज्जा, बर्गर और कई तरह के फास्ट फूड उपलब्ध हैं। लेकिन इस छोटी-सी दुकान के पीछे छिपी कहानी उनके 18 वर्षों के संघर्ष, मेहनत और जीवन के अनुभवों की है।

🎤 दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया, फिर भी संघर्ष जारी

संजय नार्डे ने बातचीत के दौरान अपने संगीत के सफर और जिंदगी के संघर्ष को साझा किया। उन्होंने बताया कि वे कई कलाकारों के साथ काम कर चुके हैं और अनेक एल्बमों में अपनी आवाज दे चुके हैं। जाकिर हुसैन और दिलीप सारंगी जैसे कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव भी उनके जीवन का हिस्सा रहा है।

अपनी पुरानी जिंदगी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने 18 साल गंवा दिए। उनका मानना है कि यदि वे पहले ही कोई छोटा व्यवसाय शुरू कर लेते, तो आज उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती थी।

उनकी यह बात सुनकर महसूस हुआ कि एक कलाकार की पहचान, प्रतिभा और वर्षों की मेहनत के बावजूद जीवन में स्थायित्व हासिल करना कितना कठिन हो सकता है।

संजय नार्डे ने अपने अनुभवों के आधार पर यह भी कहा कि कई बार आगे बढ़ने की कोशिश करने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उनकी कहानी उन लोगों के लिए एक संदेश है, जो जीवन में संघर्ष कर रहे हैं और नई शुरुआत करने का हौसला जुटा रहे हैं।

🍕 चौपाटी में स्टॉल, जिंदगी को फिर से संवारने की कोशिश

आज संजय नार्डे चौपाटी में अपने ‘Chatak मटक’ स्टॉल पर पिज्जा, बर्गर और अन्य फास्ट फूड बनाकर बेच रहे हैं। उन्होंने बातचीत में बताया कि वे रोजाना लगभग 600 से 700 रुपये तक कमा लेते हैं।

यह उनके लिए केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी है। वर्षों तक संगीत की दुनिया में काम करने के बाद आज वे मेहनत से अपना कारोबार खड़ा कर रहे हैं।

एक कलाकार के संघर्ष से लेकर छोटे व्यवसाय के जरिए नई जिंदगी शुरू करने तक का उनका सफर वाकई प्रेरणादायक है।

🏪 चौपाटी के दुकानदारों ने महापौर और आयुक्त का जताया आभार

हमने चौपाटी में अन्य दुकानदारों से भी बातचीत की। दुकानदारों ने बताया कि पहले वे अलग-अलग स्थानों पर ठेले लगाते थे। मैदान के आसपास अव्यवस्थित ढंग से दुकानें लगने के कारण वहां होने वाले रामलीला और अन्य आयोजनों में भी परेशानी होती थी।

अब नगर निगम द्वारा चौपाटी में दुकानों के लिए व्यवस्थित स्थान और सुरक्षा की व्यवस्था किए जाने से दुकानदारों को राहत मिली है। कुछ दुकानदारों ने पहले चौपाटी का विरोध किया था, लेकिन अब वे यहां कारोबार करने के अनुभव को सकारात्मक बता रहे हैं।

दुकानदारों ने महापौर संजू देवी राजपूत और नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडे के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि यहां सुरक्षा, साफ-सफाई और व्यवस्थित कारोबार की सुविधाएं मिलने से उन्हें उम्मीद है कि धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या और व्यवसाय दोनों बढ़ेंगे।

हमने दुकानदारों से सुरक्षा के बारे में भी पूछा। उनका कहना था कि पहले पुराने स्थानों पर चोरी और अन्य घटनाओं का डर बना रहता था, जबकि यहां सुरक्षा व्यवस्था होने से वे सुबह से रात तक अपेक्षाकृत निश्चिंत होकर दुकान चला पा रहे हैं।

🌃 रात 11:30 बजे तक चौपाटी में कारोबार और आयोजन

हमने रात लगभग 11:30 बजे चौपाटी का जायजा लिया। यहां क्रिकेट टूर्नामेंट, रामलीला और अन्य भव्य कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। शासकीय आयोजनों के लिए भी यह स्थान उपयोग में लाया जा रहा है।

चौपाटी में विभिन्न प्रकार की दुकानें खुलने से लोगों को खाने-पीने के विकल्प मिल रहे हैं और दुकानदारों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।

व्यवस्थित बाजार विकसित होने में समय लगता है। यदि साफ-सफाई, सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रखा जाए, तो चौपाटी स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है और दुकानदारों के कारोबार को भी आगे बढ़ा सकती है।

🙏 संजय नार्डे को दिल से सलाम

18 वर्षों के संघर्ष के बाद एक कलाकार का छोटे-से स्टॉल के माध्यम से नई शुरुआत करना हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि समाज में प्रतिभा और मेहनत करने वालों को कितनी चुनौतियों से गुजरना पड़ता है।

संजय नार्डे की कहानी हमें बताती है कि जीवन में देर से ही सही, नई शुरुआत करना भी अपने आप में बड़ी बात है। उनके जज्बे को हमारा सलाम और उनके कारोबार के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।

🟥 निष्कर्ष | संघर्ष से नई शुरुआत तक
संजय नार्डे की कहानी हमें यह सीख देती है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ आएं, मेहनत और हौसले से नई शुरुआत की जा सकती है। दिग्गज कलाकारों के साथ काम करने के बावजूद आज वे चौपाटी में ‘Chatak मचाक’ स्टॉल चलाकर आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, चौपाटी में व्यवस्थित दुकानें, सुरक्षा और सुविधाएं मिलने से स्थानीय दुकानदारों को भी बेहतर भविष्य की उम्मीद है। संजय नार्डे के संघर्ष को सलाम और उनके नए सफर के लिए शुभकामनाएं। 🙏
JB News Korba | मनीष जायसवाल — मेहनत करने वालों की आवाज।

JB News Korba की इस विशेष ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए संजय नार्डे की संघर्षभरी कहानी, चौपाटी के दुकानदारों का अनुभव और कोरबा में विकसित हो रही इस नई व्यवस्था की तस्वीर।

📹 वीडियो को अंत तक जरूर देखें।

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