रामानुजगंज में पत्रकार से दुर्व्यवहार की घटना तूल पकड़ने लगी, पत्रकार संघ ने सौंपा ज्ञापन – चेतावनी: कार्रवाई नहीं हुई तो होगा प्रशासनिक कार्यक्रमों का बहिष्कार,देखिए विडिओ

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रामानुजगंज, बलरामपुर |
नगर पालिका रामानुजगंज द्वारा “सुशासन तिहार – समाधान शिविर” कार्यक्रम के दौरान एक पत्रकार के साथ अभद्रता और दुर्व्यवहार की घटना सामने आई है, जिससे स्थानीय मीडिया जगत में आक्रोश की लहर है। पत्रकारों ने इस घटना को मीडिया की गरिमा पर हमला बताते हुए कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपा है, और दोषी पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

क्या हुआ था कार्यक्रम में?

यह घटना रामानुजगंज के लरंग साय कम्युनिटी हॉल में हुई, जहाँ 29 मई को नगर पालिका द्वारा समाधान शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में नगर के जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी और आम नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद थे। स्थानीय पत्रकार भी आमंत्रण पर वहाँ कवरेज के लिए उपस्थित थे।कार्यक्रम के दौरान नगर के पूर्व उपाध्यक्ष शैलेश गुप्ता और PWD के कार्यपालन अभियंता मोहन राम भगत के बीच रिंग रोड और अन्य निर्माण कार्यों को लेकर बातचीत हो रही थी। इसी बीच अभियंता आयोजन स्थल से निकलकर रेस्ट हाउस की ओर बढ़े, जहाँ शैलेश गुप्ता भी उनके साथ थे। मौके पर मौजूद पत्रकार घटना को कवर करने हेतु वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही अधिकारी गेट से बाहर निकले, PWD के कार्यपालन अभियंता मोहन राम भगत पत्रकार से मोबाइल बंद करने को कहा और हाथ झटकते हुए उसका मोबाइल नीचे गिरा दिया, जिससे वह क्षतिग्रस्त हो गया। पत्रकारों ने इस व्यवहार को न केवल अपमानजनक, बल्कि लोकतंत्र की चौथी स्तंभ की स्वतंत्रता पर हमला बताया।

शिकायत और ज्ञापन सौंपा गया

घटना के तुरंत बाद पत्रकार ने एसडीएम रामानुजगंज और स्थानीय थाना में शिकायत दर्ज कराई। अगले ही दिन, 30 मई को पत्रकार कल्याण संघ के नेतृत्व में पत्रकारों ने बलरामपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में पत्रकारों ने माँग की है कि दोषी कर्मचारी पर सख्त और त्वरित कार्रवाई की जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिलेभर में प्रशासनिक कार्यक्रमों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। पत्रकारों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे पत्रकार समुदाय का सवाल है।

सीएम हाउस तक पहुंच?।

घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी सरगर्मी है। सूत्रों के अनुसार, जिस कर्मचारी द्वारा यह कृत्य किया गया, उसकी पहुंच सीधे सीएम हाउस तक बताई जा रही है। यह चर्चा भी है कि उनके खिलाफ पूर्व में भी शिकायतें हुई थीं, लेकिन कथित राजनीतिक संरक्षण के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मुख्यमंत्री निवास का नाम लेकर जिले के अधिकारियों को संरक्षण दिया जाएगा? अगर ऐसा होता रहा, तो आने वाले समय में अन्य अधिकारी भी यही रवैया अपनाते हुए आम जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार करेंगे।


स्थानीय विधायक और मंत्री की भूमिका पर सवाल

इस मामले में स्थानीय विधायक एवं मंत्री श्री रामविचार नेताम की चुप्पी भी अब सवालों के घेरे में है। सूत्रों का दावा है कि आरोपी अधिकारी का उनके साथ भी निकट संपर्क है। पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि —

"क्या मंत्री महोदय ऐसे व्यक्ति को अपने क्षेत्र में बने रहने देंगे, जो न जनप्रतिनिधियों का सम्मान करता है और न ही पत्रकारों की गरिमा की कद्र करता है?"

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मंत्री नेताम इस पर क्या रुख अपनाते हैं। क्योंकि अब वह समय दूर नहीं जब उन्हें जनता और कार्यकर्ताओं के सामने पुनः जाना होगा, और जनता जवाब भी माँगेगी।

अंत में: अब निगाहें प्रशासन और सरकार पर

पत्रकार कल्याण संघ की चेतावनी, भाजपा कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया और जनता का समर्थन— इन सभी ने इस मामूली प्रतीत होने वाली घटना को एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक सवाल में बदल दिया है। अब यह कलेक्टर, एसपी और मंत्री नेताम की ज़िम्मेदारी है कि वे इस पर पारदर्शी और त्वरित निर्णय लें। यदि इस बार भी इस मामले को नजरअंदाज किया गया या राजनैतिक दबाव में दबा दिया गया, तो न केवल मीडिया का भरोसा टूटेगा, बल्कि जनता का प्रशासन पर से विश्वास भी कमजोर होगा।

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