गरियाबंद में पत्रकारों पर हमला — लोकतंत्र के प्रहरी असुरक्षित, माफिया बेलगाम,देखिए विडिओ छत्तीसगढ की बडी खबर

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रिपोर्ट: मनीष जायसवाल, JB News Korba

गरियाबंद/कोरबा, छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अब निशाने पर है। गरियाबंद जिले के पितईबंद घाट (पैरी नदी) में सोमवार को रेत माफियाओं ने खबर कवरेज कर रहे पत्रकारों पर जानलेवा हमला कर दिया। यह हमला सिर्फ कुछ पत्रकारों पर नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र की आत्मा पर हमला है।

पत्रकारों की जान पर बन आई — कैमरे और पहचान-पत्र छीने गए

पत्रकार शेख इमरान, नेमीचंद बंजारे, लक्ष्मीशंकर और जितेंद्र सिंह अवैध खनन की पड़ताल कर रहे थे। खनिज विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची, लेकिन अवैध खदान संचालक के गुर्गे जरूर पहुंच गए। पहले बहस, फिर कैमरा और पहचान पत्र छीनकर खुलेआम पिटाई शुरू कर दी गई। पत्रकारों को अपनी जान बचाने खेतों और खलिहानों में भागना पड़ा।

कुछ हमलावर बाइक और स्कूटी से उनका पीछा करते रहे। यह दृश्य किसी जंगलराज से कम नहीं था।

हमले का वीडियो वायरल — सोशल मीडिया पर आक्रोश

हमले की पूरी घटना का वीडियो अब वायरल हो चुका है। वीडियो में पत्रकार जान बचाते हुए खुद हमलावरों की बर्बरता को रिकॉर्ड करते दिख रहे हैं। वीडियो में साफ सुना जा सकता है — “फिर दिखे तो जान से मार देंगे।”
यह नजारा छत्तीसगढ़ में शासन और प्रशासन की स्थिति पर गहरी चोट करता है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया — लेकिन सवाल अब भी बाकी हैं

घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर भगवान सिंह ने एसडीएम को मौके पर रवाना किया। एडिशनल एसपी जितेंद्र चंद्राकर ने राजिम पुलिस को भेजा। लेकिन सवाल यह है कि जब पत्रकारों ने घटना की आशंका पहले ही जताई थी, तब खनिज विभाग की टीम मौके पर क्यों नहीं पहुंची? क्यों हमेशा घटना के बाद प्रशासन हरकत में आता है?

कोरबा से लेकर गरियाबंद तक माफियाओं का आतंक

कोरबा जिले में भी हालात जुदा नहीं हैं। हसदेव नदी से 24 घंटे अवैध रूप से बालू निकाली जा रही है। माफिया मनमाने रेट पर बालू बेच रहे हैं। लगातार वीडियो और शिकायतों के बावजूद खनिज अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं — “फोन भी नहीं उठाते, और माफियाओं को पहले से आगाह कर देते हैं।”

राजनीतिक संरक्षण और पैसों का खेल

इस माफिया राज की जड़ें गहरी हैं — राजनीतिक संरक्षण, खनिज अधिकारियों की मिलीभगत और पैसों का गंदा खेल। पत्रकारों को धमकी मिलना अब आम बात हो गई है। छत्तीसगढ़ में अब यह कोई बड़ी बात नहीं मानी जाती कि “पत्रकार की जान चली जाए और प्रशासन सिर्फ श्रद्धांजलि दे।”

कानून सिर्फ कागजों में — पत्रकारों की सुरक्षा अधर में

राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून प्रस्तावित था, लेकिन वह आज तक लागू नहीं हो पाया। जब चौथे स्तंभ पर हमला हो रहा है, तो यह सीधा-सीधा लोकतंत्र पर हमला है।

हमारी मांगें — एकजुट पत्रकारों की आवाज

  1. मुख्यमंत्री  और प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर संज्ञान लें।
  2. दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
  3. पत्रकार सुरक्षा कानून को तत्काल लागू किया जाए।
  4. पूरे राज्य में माफियाओं पर व्यापक कार्रवाई की जाए।
  5. रेत खनन की सभी गतिविधियों की सीबीआई/एसआईटी जांच हो।

📢 पत्रकारिता पर हमला, लोकतंत्र पर हमला है। 📢 इस रिपोर्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। 📢 पत्रकारों को चुप कराने की साजिशों को बेनकाब करें।


JB News Korba की ये विशेष रिपोर्ट पूरे छत्तीसगढ़ के पत्रकारों की ओर से एक चेतावनी है — अगर अब भी आवाज नहीं उठाई गई, तो कल शायद बोलने वाला कोई न बचे।

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