छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों में मीडिया कवरेज को लेकर एक सरकारी आदेश ने बड़ा सियासी घमासान खड़ा कर दिया है। स्वास्थ्य सचिव द्वारा जारी एक आदेश में मीडियाकर्मियों के लिए अस्पतालों में कवरेज से पहले अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया, जिसके बाद पत्रकार जगत से लेकर विपक्षी दलों तक ने सरकार पर हमला बोल दिया। बढ़ते विवाद को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को खुद सामने आकर मामले पर सफाई देनी पड़ी।
हाल ही में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में किसी भी प्रकार की मीडिया कवरेज के लिए पत्रकारों को पहले अस्पताल के पीआरओ (PRO) या किसी जिम्मेदार अधिकारी से अनुमति लेनी होगी। इस आदेश के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या सरकार अस्पतालों की अव्यवस्था और खामियों को छिपाने के लिए मीडिया पर नकेल कसना चाहती है
आदेश पर मचा सियासी बवाल, मंत्री ने संभाला मोर्चा
इस आदेश के बाद पत्रकार जगत में आक्रोश फैल गया और विरोध प्रदर्शन की सुगबुगाहट तेज हो गई। मामले को तूल पकड़ता देख स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया:
- यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा।
- स्वास्थ्य सचिव वर्तमान में विदेश दौरे पर हैं, उनके लौटने के बाद आदेश में जरूरी संशोधन किए जाएंगे।
- नया और संशोधित आदेश मीडिया से बातचीत करने के बाद ही जारी किया जाएगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि कोरोना काल के अनुभवों को देखते हुए संक्रमण फैलने की आशंका के कारण यह आदेश जारी किया गया था, लेकिन उनकी मंशा मीडिया को रोकने की नहीं है। छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में मीडिया की ‘No Entry’?
विपक्ष का सरकार पर हमला: “अव्यवस्था छिपाने की तानाशाही”
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस आदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, “जब से राज्य में भाजपा की सरकार आई है, स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हो चुकी हैं। अब साय सरकार व्यवस्था सुधारने के बजाय अस्पतालों में मीडिया कवरेज पर प्रतिबंध लगा रही है। यह सीधी-सीधी तानाशाही है और अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश है।” छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में मीडिया की ‘No Entry’?
पहले भी हो चुका है कवरेज को लेकर विवाद
यह पहली बार नहीं है जब अस्पतालों में कवरेज को लेकर विवाद हुआ है। कुछ समय पहले रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में भी मीडियाकर्मियों और सुरक्षा गार्डों के बीच कवरेज को लेकर जमकर बहस हुई थी। उस वक्त स्वास्थ्य मंत्री ने पत्रकारों को कवरेज से न रोकने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके ठीक उलट नया आदेश जारी होने से विवाद और बढ़ गया।
फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री के हस्तक्षेप के बाद यह विवादित आदेश ठंडे बस्ते में चला गया है। लेकिन इस घटना ने “प्रेस की स्वतंत्रता” और सरकारी संस्थानों की पारदर्शिता पर एक नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें उस संशोधित आदेश पर टिकी हैं, जिसे सरकार मीडिया से चर्चा के बाद लाने का वादा कर रही है।















