कोरबा :- कोल इंडिया की सहायक कंपनी SECL (साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड) की कुसमुंडा परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है। पर इस बार चर्चा उत्पादन या उपलब्धियों को लेकर नहीं, बल्कि एक संभावित बड़े घोटाले को लेकर है — ऐसा घोटाला, जिसने सरकारी खजाने पर लगभग 1700 करोड़ रुपये की सेंधमारी की हो सकती है।
70 लाख टन कोयला का स्टॉक या 5 लाख टन का छलावा?
सूत्रों से मिली जानकारियों के अनुसार, SECL कुसमुंडा प्रोजेक्ट के अंदर वर्तमान में 5 लाख टन से भी कम कोयला मौजूद है, जबकि दस्तावेजों और रिपोर्टों में 70 लाख टन का स्टॉक दिखाया गया है। यह अंतर केवल आंकड़ों की भूल नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
कोयले में मिट्टी और पत्थर मिलाकर सप्लाई करने का आरोप….
स्थानीय कंपनियों और व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कोयले के नाम पर मिट्टी और पत्थर का मिश्रण दिया जा रहा है। यही कारण है कि अब कोई भी कंपनी इस खदान से कोयला खरीदने को तैयार नहीं है। 3500-4000 रुपये प्रति टन बिकने वाला कोयला आज नीलामी में बेस प्राईस पर भी नहीं बिक पा रहा है।
क्या कहती है घोटाले की कहानी….
सूत्रों के अनुसार, यह घोटाला लगभग 1700 करोड़ रुपये का हो सकता है? यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश की संपत्ति के साथ किया गया संगठित धोखाधड़ी बड़ा भ्रष्टाचार है। जानकारों का मानना है की यह साजिश केवल स्थानीय अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि SECL के उच्च अधिकारियों की भी मिलीभगत और उनके संरक्षण से अंजाम दी गई है।
बार-बार विजिलेंस का निरक्षण, लेकिन पकड़ से दूर करोड़ों का भ्रष्टाचार…
सूत्रों की माने तो चौंकाने वाली बात यह है की विजिलेंस टीम कई बार जांच के लिए पहुंची, लेकिन करोड़ों का भ्रष्टाचार उनके रडार में नहीं आया?कहीँ विभागीय अधिकारियों और प्रशासनिक मिलीभगत से सबूतों को तो नष्ट तो नहीं कर दिया गया है? यह जांच का विषय है।
आखिर कोयला स्टाक का 65 लाख टन कोयला गया कहां….
सबसे बड़ा सवाल यही है — अगर कागजों पर स्टॉक में 70 लाख टन कोयला दिखाया जा रहा है और जमीनी हकीकत पर केवल 5 लाख टन कोयला है तो, बाकी 65 लाख टन कोयला धरती निगल गई या कोई और खा गया? जब SECL के जिम्मेदार अधिकारियों से यह सवाल किया जाता है तो चुप्पी का महासागर दिखाई पड़ता है और हिम्मत जुटाकर बचाव करते हुए जांच की बातें सुनने को मिलती हैं, पर कोई ठोस जवाब नहीं है!
जनता की मांग उच्चस्तरीय और स्वतंत्र एजेंसियों से हो जांच….
इस बड़े घोटाले पर आमजन और उद्योग जगत की मांग है की सरकार इस घोटाले की जांच CBI या ED जैसी स्वतंत्र एजेंसीयों से निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सच्चाई लोगों के सामने आ सके और दोषियों को सज़ा मिल सके।
“जब कोयले की कालिख इतनी गहरी हो जाए की, ईमानदारी की रौशनी भी बुझ जाए — तब सवाल उठाना जरूरी हो जाता है “















