रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में नवजात शिशु के पास HIV पॉजिटिव मदर का पोस्टर चस्पा करने के मामले में FIR दर्ज की गई है। घटना 6 अक्टूबर को हुई जब HIV पॉजिटिव महिला ने बच्चे को जन्म दिया। नवजात को PICU में शिफ्ट किया गया। इस दौरान अस्पताल स्टाफ ने लाल रंग के बड़े चार्ट पर बोल्ड अक्षरों में लिखा “HIV POSITIVE MOTHER” और उसे बच्चे के पास चस्पा कर दिया। पोस्टर इतना बड़ा था कि दूर से भी पढ़ा जा सकता था।
पीड़ित महिला के पति ने बताया कि जब उन्हें यह स्थिति पता चली, तो आंखों में आंसू आ गए। मेडिकल स्टाफ उनके साथ दूरी बनाने लगा। तीन दिनों तक पोस्टर वहीं लगा रहा। महिला ने पति को बताने के बाद भी यह स्थिति जारी रही। 9 अक्टूबर को संयोग से पति ने दरवाजे के खुले स्पॉट से अपने बच्चे को देखा और पोस्टर को नजदीक से देखा, जिससे उन्हें गहरा आघात पहुँचा।
हाईकोर्ट ने इस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया और मुख्य सचिव से व्यक्तिगत शपथपत्र मांगा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि यह कृत्य न केवल अमानवीय है, बल्कि नैतिकता और निजता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। घटना का संज्ञान NGO ने भी लिया और मामले की शिकायत मौदहापारा थाने में दर्ज कराई।
फिलहाल पुलिस ने अस्पताल प्रशासन को नोटिस भेजा है और दोषी डॉक्टरों के नाम मांगे हैं। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है, लेकिन विभागीय जांच चल रही है और रिपोर्ट मंगलवार तक प्रस्तुत की जाएगी। पुलिस ने बताया कि जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
HIV और AIDS में अंतर यह है कि HIV एक वायरस है जो इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है, जबकि AIDS वह अवस्था है जिसमें इम्यून सिस्टम गंभीर रूप से प्रभावित होता है। HIV संक्रमण का इलाज अभी तक पूर्ण रूप से संभव नहीं है, लेकिन एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) के माध्यम से इसके प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है।
इस घटना ने अस्पताल में गोपनीयता और संवेदनशीलता की कमी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन और पुलिस को मिलकर यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में इस तरह की अमानवीय घटनाएँ न हों और मरीजों का सम्मान एवं गोपनीयता बनी रहे।















