कोरबा। छत्तीसगढ़ साकेत पनिका समाज छत्तीसगढ़ राज्य के प्रतिनिधि मंडल ने शुक्रवार, 8 दिसंबर 2025 को महामहिम राष्ट्रपति महोदय, भारत शासन नई दिल्ली के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पनिका/पंवका जाति को 08 दिसंबर 1971 (तत्कालीन मध्यप्रदेश) पूर्व की अनुसूचित जनजाति सूची में पुनः शामिल करने की मांग की गई।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि—
- सन 1950 से पूर्व समूचे मध्यप्रदेश में पनिका/पंवका जाति अनुसूचित जनजाति में दर्ज थी, लेकिन बाद में प्रशासनिक त्रुटि व नीतिगत कारणों से इन्हें सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि जाति की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पूरी तरह जनजातीय समुदाय जैसी ही रही है।
- कानून और जनजातीय अध्ययन से जुड़े संस्थानों की विभिन्न रिपोर्टों—जैसे ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट, मानव-चार विभाग, ‘कुलुंग-खार’ आदि के अध्ययन—में पनिका जाति को स्पष्ट रूप से जनजाति बताया गया है।
- नागपुर समझौता 1949, अधिसूचना क्रमांक 362–777–12 के अनुसार भी पनिका/पंवका जाति को अनुसूचित जनजाति माना गया था तथा 37वें नंबर पर सूचीबद्ध किया गया था।
- 17 दिसंबर 1971 की मध्यप्रदेश राजपत्र अधिसूचना में भी पनिका/पंवका जाति को आदिवासी वर्ग से बाहर नहीं किया गया था, किंतु बाद में सूची संशोधन के दौरान इन्हें हटाया गया, जिसे समाज ‘अनुचित एवं अन्यायपूर्ण’ बताता है।
- समाज ने बताया कि 2000 में मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद भी आदिम जाति कल्याण विभाग, भोपाल की कई रिपोर्टों में इन्हें पूर्ववत जनजाति होने का प्रमाण मिलता है।
समाज ने कहा कि छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में पनिका/पंवका समाज की जीवनशैली, संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाज, आजीविका, सामाजिक व्यवहार, खान-पान, धार्मिक-सांस्कृतिक आचरण—सभी आदिवासी समुदायों से मेल खाते हैं, और यह समुदाय पूरी तरह से जनजातीय विशेषताओं को दर्शाता है।
ज्ञापन में मांग की गई कि पनिका/पनका समाज को तत्काल प्रभाव से 08 दिसंबर 1971 पूर्व की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किया जाए, जिससे समुदाय के अधिकारों की पुनर्बहाली हो सके।
प्रतिनिधि मंडल में समाज के विभिन्न पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।















