Monday, February 16, 2026

स्वर्गीय कन्हैया लाल जायसवाल को पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल सहित लोगों ने दी श्रद्धांजलि,देखिए विडिओ

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22 जनवरी को चंदनपान, तेरहवीं, ब्रह्मभोज एवं शांतिपाठ में शामिल हुए सैकड़ों लोग
कोरबा। कोरबा के प्रतिष्ठित नागरिक, सेवानिवृत्त जिला खाद्य अधिकारी एवं अधिवक्ता रहे स्वर्गीय श्री कन्हैया लाल जायसवाल को 22 जनवरी 2026 को उनकी चंदनपान, तेरहवीं, ब्राह्मणभोज एवं शांतिपाठ में शामिल होकर  लोगों ने श्रद्धांजलि दी।

लालूराम कालोनी स्थित निज निवास में 22 जनवरी को दोपहर 12.00 बजे स्वर्गीय श्री कन्हैया लाल जायसवाल की आत्मशांति के लिए उनके पुत्रों जिला पंचायत कोरबा के पूर्व उपाध्यक्ष अजय जायसवाल, बजरंग जायसवाल, अमित जायसवाल एवं सुमित जायसवाल सहित परिजनों ने चंदनपान/गंगापूजन, तेरहवीं, ब्रह्मभोज का आयोजन किया था। विद्वान पंडितों ने चंदनपान में देवलोक गमन कर गए 80 वर्षीय स्वर्गीय श्री कन्हैया लाल जायसवाल की दिव्य आत्मा की शांति के लिए विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और गीता पाठ कर उनकी आत्मा को भगवान के श्रीचरणों में स्थान मिले, इसके लिए आहूति दी गई।
दी गई श्रद्धांजलि

पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल सहित सैकड़ों लोग अजय जायसवाल के निज निवास पहुंचे और चंदनपान/गंगापूजन, तेरहवीं (ब्रह्मभोज) में शामिल हुए। इसके बाद अपराह्न 4.00 बजे डीडीएम रोड स्थित होटल हरिमंगलम में आयोजित शांति पाठ में भी सैकड़ों लोग पहुंचे और शांति पाठ का श्रवण किया। गायत्री परिवार से आए विद्वान आचार्यों ने स्वर्गीय श्री कन्हैया लाल जायसवाल की दिव्य आत्मा की शांति के लिए पाठ किया। इस अवसर पर विद्वान पंडितों ने कहा- जब शरीर थक जाता है, तो इस शरीर को त्याग कर नए शरीर का धारण करता है और नया खेल खेलता है।


जीवन शाश्वत है और निरंतर चलता ही रहता है। मृत्यु भी शाश्वत है, लेकिन आत्मा कभी मरती नहीं, सिर्फ एक शरीर छोड़कर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है।
पूर्वजों का आशीर्वाद हमें सुखद भविष्य देता है…

पूर्वजों का आशीर्वाद परिवार को सुखद भविष्य देता है, इसलिए बुजूर्गों का सम्मान, आदर एवं उनकी सेवा संतानों का कर्त्तव्य होता है। सबको चौथेपन में थका हुआ शरीर मिलेगा और कर्म के अनुसार नई पीढ़ि उसका अनुशरण करता है, इसलिए संतानों को चाहिए कि अपने बुजूर्ग माता-पिता का आदर, सत्कार सहित सेवा का सुअवसर नहीं छोड़ना चाहिए और बुजूर्ग के देवलोक गमन के पूर्व निकला आशीर्वाद जीवन को आबाद कर देता है।
आंखों में अश्रु का सैलाब और मेहमानों की आवभगत

स्वर्गीय श्री कन्हैया लाल जायसवाल के पुत्रों की आंखों में अश्रु का सैलाब था, लेकिन फिर भी मेहमानों की आवभगत में जुटे रहे।
अग्रज पुत्र अजय जायसवाल ने कहा कि घर का मुखिया यूं ही चले गए और हम अनाथ सा महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनकी प्रेरणा और सादगीभरा जीवन हमें हमेशा याद आएंगे। पिता का आस भरा चेहरा आज भी नजरों में तैर रहा है… उनकी अब सिर्फ यादें रह गई। धर्मपत्नी श्रीमती प्रभादेवी जायसवाल, पति के जाने के बाद जैसे दुनिया ही चली गई…। आंखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा था।
श्रद्धांजलि कैमरे की नजर से…

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