धारा 138 एनआई एक्ट मामले में बैंक को बड़ी राहत, आरोपी की अपील खारिज

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कोरबा। चेक अनादरण (धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा डॉ. ममता भोजवानी की अदालत ने आरोपी संजय ओगरे द्वारा दायर दाण्डिक अपील क्रमांक 44/2026 को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
मामले में विचारण न्यायालय ने आरोपी संजय ओगरे को दोषी ठहराते हुए 2 वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹25 लाख की प्रतिकर/अर्थदंड राशि से दंडित किया था। साथ ही अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में 6 माह के अतिरिक्त सश्रम कारावास का आदेश भी दिया गया था। अपीलीय न्यायालय ने भी इस सजा और दोषसिद्धि को उचित मानते हुए यथावत कायम रखा।
प्रकरण में आरोपी ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी, लेकिन न्यायालय ने दस्तावेजी साक्ष्यों और विधिक तथ्यों के आधार पर आरोपी के तर्कों को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने माना कि आरोपी द्वारा विधिक दायित्व के निर्वहन के लिए जारी किया गया चेक अनादरित हुआ था तथा विधिक नोटिस प्राप्त होने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया, जिससे धारा 138 एनआई एक्ट के तहत अपराध सिद्ध होता है।
इस महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष मामले के तथ्यात्मक एवं विधिक पक्षों को मजबूती से रखा, जिसके परिणामस्वरूप बैंक के पक्ष में आया फैसला अपीलीय न्यायालय में भी कायम रहा।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम का मुख्य उद्देश्य वित्तीय लेन-देन में विश्वास बनाए रखना और वैध देनदारियों के भुगतान को सुनिश्चित करना है।

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