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इस पोस्ट में दो वीडियो और कुछ फोटोग्राफ है जिसे आप सब से साझा कर रहा हूं।, पहला वीडियो दिनांक 05 जून 2025 का है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कोरबा के परिवहन कार्यालय के सामने स्थित इस परिसर में प्रशासन द्वारा पूरे तामझाम, प्रचार-प्रसार और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत 200 से अधिक पौधे लगाए गए थे। उस दिन बड़े-बड़े दावे किए गए कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
दूसरा वीडियो ठीक एक वर्ष बाद आज दिनांक, 05 जून 2026 का है।
दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई यह है कि जिस स्थान पर लाखों रुपए खर्च करके, पूरे तामझाम के साथ सैकड़ों पौधे लगाए गए थे, वहाँ आज एक भी पेड़ जीवित दिखाई नहीं देता। “मां” के नाम से लगाए गए एक भी पेड़ जीवित नहीं है, देख रेख के अभाव में सब मर गए।
मेरा सवाल यह है कि उन्हें बचाने की जिम्मेदारी किसकी थी?
मेरा हमेशा से मानना रहा है कि पेड़ लगाना आसान है, लेकिन पेड़ बचाना सबसे बड़ी और मुश्किल जिम्मेदारी है। किसी भी पौधे को सिर्फ फोटो खिंचवाकर या कार्यक्रम आयोजित कर प्रचार प्रसार करके जीवित नहीं रखा जा सकता। उसे नियमित पानी, सुरक्षा और देखभाल की आवश्यकता होती है। कम से कम शुरुआती एक-दो वर्षों तक उसकी निगरानी जरूरी होती है।
जब लाखों रुपये खर्च कर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, तब यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लगाए गए पौधे जीवित रहें और भविष्य में छाया, फल और स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करें। यदि एक वर्ष बाद एक भी पौधा जीवित नहीं बचा, तो यह केवल पौधों की नहीं, बल्कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की विफलता है।
विडंबना यह भी है कि एक ओर “एक पेड़ माँ के नाम” के नाम पर पौधे लगाए जाते हैं, फिर भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते है, वहीं दूसरी ओर कोरबा के बालको क्षेत्र में बहुमंजिला इमारत निर्माण के लिए लगभग 440 पुराने छायादार और फलदार पेड़ों की बलि दे दी जाती है। वर्षों से पर्यावरण को जीवन देने वाले उन पेड़ों को काट दिया गया, जबकि नए लगाए गए पौधों को बचाने का भी प्रयास नहीं हुआ।
पर्यावरण संरक्षण केवल नारों, बैनरों और एक दिन के आयोजनों से नहीं होगा। इसकी सफलता तब मानी जाएगी जब लगाए गए पौधे वृक्ष बनकर खड़े दिखाई दें।
मै शहर का एक नागरिक होने के नाते कोरबा प्रशासन से जानना चाहता हूं कि परिवहन कार्यालय के सामने लगाए गए सैकड़ों पौधों में से एक भी पेड़ जीवित क्यों नहीं बचा?
ये फोटो और वीडियो प्रमाण है, स्वयं जाकर संज्ञान ले सकते है।
जय हिंद
अब्दुल नफीस खान
अधिवक्ता, कोरबा















