जांजगीर-चांपा, 8 जुलाई। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्य सरला कोसरिया ने मंगलवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जनसुनवाई की। जनसुनवाई के दौरान आयोग ने कई मामलों में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। प्रदेश स्तर पर यह 410वीं तथा जांजगीर-चांपा जिले में 12वीं जनसुनवाई रही, जिसमें कुल 28 प्रकरणों पर सुनवाई हुई।

सबसे महत्वपूर्ण मामले में आयोग ने एक लैब टेक्नीशियन के खिलाफ आदेश का पालन नहीं करने पर कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने निर्देश दिए कि आवेदिका, अनावेदक और बच्चे का डीएनए टेस्ट जिला कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) की निगरानी में कराया जाए। जांच का पूरा खर्च संबंधित अनावेदक वहन करेगा। आयोग ने यह भी कहा कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध सेवा से निलंबन की कार्रवाई करने और दो माह के भीतर डीएनए जांच रिपोर्ट आयोग को भेजने के लिए कलेक्टर एवं सीएमएचओ से कार्रवाई कराने के निर्देश दिए गए।
आयोग कार्यालय में विवाद करने वालों ने मांगी माफी
एक अन्य मामले में उन अनावेदकों ने आयोग के समक्ष माफी मांगी, जिन पर वर्ष 2024 में महिला आयोग कार्यालय में कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार और झगड़ा करने का आरोप था। आयोग ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर भविष्य में विवाद से बचने की सलाह दी और प्रकरण का निराकरण कर दिया।

पति-पत्नी को साथ रहने और नियमित काउंसलिंग की सलाह
एक वैवाहिक विवाद के मामले में आयोग को बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच परिवार परामर्श केंद्र में समझौता हो चुका है और वे अलग मकान लेकर साथ रह रहे हैं। दंपति के तीन वर्ष छह माह के पुत्र को देखते हुए आयोग ने दोनों को भविष्य में विवाद न करने की समझाइश दी तथा सखी प्रशासिका को प्रति माह एक बार काउंसलिंग कराने के निर्देश देते हुए प्रकरण समाप्त कर दिया।
न्यायालय में लंबित तलाक का मामला आयोग ने किया बंद
एक अन्य प्रकरण में आयोग ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच तलाक का मामला न्यायालय में लंबित है, जिसकी जानकारी आवेदिका ने आयोग से छिपाई थी। इस आधार पर आयोग ने मामले को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए नस्तीबद्ध कर दिया।
महिला कर्मचारियों की शिकायत पर होगी आईसीसी जांच
मोबाइल मेडिकल यूनिट में कार्यरत महिला कर्मचारियों द्वारा अपने प्रोजेक्ट मैनेजर के खिलाफ लगाए गए आरोपों के मामले में आयोग ने विस्तृत संशोधित शिकायत प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही सखी प्रशासिका को आंतरिक शिकायत समिति (ICC) से जांच कराने के लिए संबंधित अधिकारी को पत्र भेजने तथा पूरे मामले की जानकारी जिला कलेक्टर को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि महिला उत्पीड़न के मामलों में आयोग के आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों के माध्यम से वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।















