सेवा संकल्प अभियान में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी, कलेक्टर ने कारीगरों और महिला समूहों को बाजार से जोड़ने का दिया भरोसा
कोरबा। जिले में जनजातीय परिवारों, स्थानीय कारीगरों, स्व-सहायता समूहों और महिलाओं के पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ने की दिशा में सेवा संकल्प अभियान के तहत महत्वपूर्ण पहल की गई। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें बाँस से निर्मित सूपा, टुकनी, टोकरी सहित उपयोगी एवं सजावटी सामग्री, कुम्हारों द्वारा तैयार खिलौने, कोसा वस्त्र और वनोपज से तैयार खाद्य सामग्री प्रदर्शित की गई।
प्रदर्शनी में स्थानीय उत्पादों की विविधता के साथ कोरबा की समृद्ध जनजातीय एवं पारंपरिक कला की झलक देखने को मिली। जिला प्रशासन का प्रयास है कि इन उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाए तथा इनसे जुड़े परिवारों के लिए आजीविका के बेहतर अवसर तैयार हों।
दीपावली में स्थानीय उत्पाद बनेंगे आकर्षक उपहार
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाले स्व-सहायता समूहों और महिलाओं को आगामी दीपावली को ध्यान में रखते हुए बाँस से आकर्षक एवं उपयोगी उपहार सामग्री तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि दीपावली पर उपहार देने की परंपरा को स्थानीय उत्पादों से जोड़ा जा सकता है। बाँस से तैयार आकर्षक टोकरियां, सजावटी सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं को बाजार में उपलब्ध कराया जा सकता है। जिला प्रशासन ऐसे उत्पादों को प्रोत्साहित करने और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में सहयोग करेगा।
कलेक्टर ने कहा कि यह पहल केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जनजातीय परिवारों, बिरहोर समाज, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों के पारंपरिक हुनर को स्थायी आजीविका का माध्यम बनाना है।
उन्होंने प्रदर्शनी में लगाए गए स्थानीय उत्पादों को जिला प्रशासन द्वारा क्रय किए जाने की बात भी कही, ताकि उत्पाद तैयार करने वाले कारीगरों और महिलाओं को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
7 अक्टूबर को फिर लगेगी स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी
कलेक्टर ने बताया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत आगामी 7 अक्टूबर को भी स्थानीय उत्पादों से संबंधित प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को अधिक लोगों तक पहुंचाना और उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ना है।
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर ने कहा कि बाँस से तैयार उत्पादों की अपनी अलग पहचान और मांग है। जनजातीय परिवारों, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय कलाकारों को उचित मूल्य एवं बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए ऐसे आयोजन उपयोगी हैं।
एमआईसी सदस्य एवं पार्षद नरेंद्र देवांगन ने कहा कि स्थानीय कारीगरों और जनजातीय समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उनके पारंपरिक उत्पादों को बाजार से जोड़ना जरूरी है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि गोपाल मोदी, कुमारी डिंपल भेड़िया, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन, ट्राइफेड के संदीप शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
JB News Korba | Manish Jaiswal
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