कोरबा। शारदीय नवरात्रि के आगमन के साथ ही कोरबा शहर देवी आराधना के रंग में रंगने की तैयारी में जुट गया है। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्र पर्व को लेकर शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और मोहल्लों में दुर्गा पंडालों का निर्माण तेजी से चल रहा है। कहीं 10 फीट तो कहीं 18 फीट तक ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। मूर्तिकारों के अनुसार, शहर की बड़ी समितियों की करीब 80 फीसदी प्रतिमाएं तैयार हो चुकी हैं। अब प्रतिमाओं के चेहरे की फिनिशिंग, रंग-रोगन, आभूषण और अंतिम सजावट का काम किया जा रहा है।
शहर में इस वर्ष 300 से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की तैयारी है। पूजा समितियां पंडालों को आकर्षक रूप देने के साथ विद्युत रोशनी, प्रवेश-निकास और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दे रही हैं। वहीं, मंदिरों में रंगाई-पोताई और साफ-सफाई का काम भी जारी है। मनोकामना ज्योति कक्षों को तैयार किया जा रहा है। कई स्थानों पर बंगाली पद्धति से दुर्गा पूजा की परंपरा निभाई जाती है, जिसके लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं।नवरात्रि को लेकर शहर में तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। प्रतिमाओं की सजावट से लेकर पंडालों की रोशनी और मंदिरों की व्यवस्था तक, हर जगह पर्व की रौनक दिखाई देने लगी है। अगले कुछ दिनों में दुर्गा पंडालों के पूरी तरह तैयार होने के साथ शहर में नौ दिनों तक चलने वाली देवी आराधना का उत्सवी माहौल और गहरा जाएगा।

रविवार से नवरात्रि की शुरुआत, हाथी पर आगमन की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। पंडितों ने बताया कि देवी भागवत पुराण में नवरात्रि के प्रारंभ के दिन के आधार पर देवी के वाहन का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि रविवार या सोमवार से नवरात्रि शुरू होने पर देवी का वाहन हाथी होता है। हाथी को सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है।
शुक्र अस्त होने से मांगलिक कार्यों पर विराम
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 11 अक्टूबर को प्रथम नवरात्रि पर घटस्थापना की जाएगी। बताया गया है कि सुबह करीब 10:04 बजे चंद्रमा कन्या राशि से तुला राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु के कर्क राशि में स्थित होने के कारण गुरु-चंद्रमा से संबंधित विशेष योग बनने की मान्यता है।
13 अक्टूबर को शुक्र अस्त होने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। इसके बाद 19 अक्टूबर को सुबह करीब 10:51 बजे तक अष्टमी तिथि रहेगी और फिर नवमी शुरू होगी। इस कारण महाअष्टमी और महानवमी का पूजन-हवन एक ही दिन किया जाएगा।ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, 28 अक्टूबर को शुक्र उदय होंगे। हालांकि, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों के लिए केवल शुक्र उदय होना पर्याप्त नहीं माना जाता, इसके लिए शुभ मुहूर्त की गणना भी आवश्यक होती है। ऐसे में गृह प्रवेश की योजना बना रहे लोगों को अनुकूल मुहूर्त का इंतजार करना पड़ सकता है।

















