4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद कर कोल परिवहन रोकने की तैयारी, किसान सभा करेगी चक्काजाम

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भू-विस्थापितों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में 100% वैकल्पिक रोजगार देने की मांग, मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन का ऐलान

कोरबा। एसईसीएल की कुसमुंडा खदान क्षेत्र में भू-विस्थापितों और स्थानीय बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजगार देने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा ने 4 नवंबर 2026 को कुसमुंडा खदान बंद करने और कोयला परिवहन पूरी तरह रोकने का ऐलान किया है। किसान सभा का कहना है कि इस संबंध में कलेक्टर और एसईसीएल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर मांगों पर सकारात्मक पहल करने की अपील की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत झा ने आरोप लगाया कि एसईसीएल में जमीन अधिग्रहण के बाद हजारों भू-विस्थापित परिवार रोजगार के लिए भटक रहे हैं। वहीं, आउटसोर्सिंग कंपनियों में प्रभावितों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुसमुंडा और गेवरा क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में भू-विस्थापितों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है। किसान सभा इसी के विरोध में 4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद कर कोयला परिवहन रोकने का आंदोलन करेगी।

किसान सभा के जिला अध्यक्ष जय कौशिक और जिला सचिव दीपक साहू ने कहा कि खदान विस्तार के नाम पर ग्रामीणों की पूरी जमीन अधिग्रहित कर ली जाती है, लेकिन रोजगार देने के समय प्रभावित परिवारों को उनका पूरा अधिकार नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि 70 और 30 प्रतिशत रोजगार के नाम पर व्यवस्था बनाकर प्रभावितों के हिस्से का रोजगार छीना जा रहा है तथा जिले के बाहर के लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर अपनी जमीन और गांव से बेदखल हुए विस्थापित परिवारों का जीवन स्तर सुधरने के बजाय और खराब हुआ है। हजारों छोटे किसानों को खेती-किसानी से अलग होना पड़ा है और उन्हें रोजगार के अवसर भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में प्रभावितों के सामने संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

वहीं, भू-विस्थापित नेता दामोदर श्याम और रेशम यादव ने आरोप लगाया कि जिन परिवारों की जमीन अधिग्रहित की गई है, उन्हें न तो स्थायी रोजगार मिल रहा है और न ही उनके परिवारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में पर्याप्त अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने प्रभावित परिवारों से 4 नवंबर को एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र में प्रस्तावित प्रदर्शन और चक्काजाम में शामिल होने की अपील की है।

किसान सभा की प्रमुख मांगें

  1. खदान विस्तार के लिए पूर्व में और वर्तमान में जिन गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई है, वहां के बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में पहली प्राथमिकता के आधार पर वैकल्पिक रोजगार दिया जाए।
  2. खनन प्रभावित क्षेत्र और कोरबा जिले के बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
  3. किसी आउटसोर्सिंग कंपनी का काम समाप्त होने के बाद नई कंपनी में पुराने कर्मचारियों को दोबारा काम पर रखा जाए। किसान सभा ने गोदावरी कंपनी बंद होने से जिले के सैकड़ों कर्मचारियों के बेरोजगार होने का मुद्दा भी उठाया है।
  4. आउटसोर्सिंग कंपनियों में 70 और 30 प्रतिशत रोजगार के कथित विभाजन की व्यवस्था समाप्त कर भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता देते हुए खनन प्रभावित जिले के बेरोजगारों को 100 प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित किया जाए।

किसान सभा ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने के विरोध में 4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद और कोयला परिवहन रोकने का आंदोलन किया जाएगा।

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