राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की अमर गूंज : बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ने जगाया राष्ट्रभक्ति का जोश

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नई दिल्ली। आज पूरा देश अपने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की गूंज से एक बार फिर गौरवान्वित है। 7 नवंबर 1875 को महान बंगाली लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखी गई यह रचना आज भी भारतवासियों के हृदय में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाती है।

यह गीत पहली बार 1882 में प्रकाशित उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया था। इस गीत के शब्दों में भारतमाता की भव्यता, शक्ति और सौंदर्य का अनुपम वर्णन है। ‘वंदे मातरम्’ का अर्थ है — “माँ, मैं तेरी वंदना करता हूँ।”

गीत की शुरुआती पंक्तियाँ —
“सुजलाम् सुफलाम् मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलाम् मातरम्।”
भारतभूमि की हरियाली, समृद्धि और शीतलता का वर्णन करती हैं। वहीं बाद की पंक्तियों में भारतमाता को शक्ति, विद्या और भक्ति के रूप में पूजा गया है —
“त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी, वाणी विद्यादायिनी।”

यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का घोष बन गया था। देशभर में जब-जब इस गीत की गूंज हुई, तब-तब लोगों के हृदय में राष्ट्रभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित हुई।

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